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यह है चावल का “बादशाह”, नाम सुनते ही आती है राजाओं जैसी फीलिंग, स्वाद और सुगंध के दीवाने लोग – Uttar Pradesh News

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रायबरेली के शिवगढ़ क्षेत्र के केशरखेड़ा गांव में उगाया जाने वाला बादशाह पसंद चावल सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि अपनी कहानी के लिए भी मशहूर है. किसान रोशन वर्मा बताते हैं कि उनके पूर्वज कहते थे कि यह चावल कभी राजा-महाराजाओं की पहली पसंद हुआ करता था. सोचिए, आज भी वही स्वाद और खुशबू लोगों को दीवाना बना रही है.

खाने में चावल का नाम सुनते ही हर किसी के मन में भूख जाग उठती है. लेकिन अगर मिले बादशाह पसंद चावल, तो लोग इसे खाने के लिए खास उत्सुक हो जाते हैं. रायबरेली जनपद के ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर बादशाह पसंद चावल की खेती की जाती है. इसका स्वाद ऐसा लाजवाब होता है कि जो एक बार इसे खा लेता है, वह इसके दीवाने हो जाते हैं. इसी वजह से बाजार में इसकी मांग हमेशा अधिक रहती है.

बादशाह पसंद चावल की खेती करने वाले किसान रोशन वर्मा बताते हैं कि यह चावल आम चावल से काफी छोटा होता है और खाने में बेहद स्वादिष्ट लगता है. इसके साथ ही इसमें एक खास सुगंध भी होती है, जो इसे और भी लुभावना बनाती है.

बादशाह पसंद चावल साधारण धान की तुलना में तैयार होने में काफी समय लेता है. यही वजह है कि कम ही किसान इसकी खेती करते हैं. हालांकि, इसके स्वाद और खुशबू की वजह से बाजार में इसकी खूब मांग रहती है और इसलिए यह सामान्य चावल की तुलना में महंगा बिकता है.

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बादशाह पसंद धान 130 से 150 दिन में तैयार होता है, जबकि साधारण धान केवल 90 से 120 दिन में तैयार हो जाती है. इसी कारण ज्यादातर किसान इसकी खेती नहीं करते. लेकिन, जो किसान बादशाह पसंद धान की खेती करते हैं, उन्हें इसके लंबे समय के बावजूद अच्छा मुनाफा मिलता है.

बादशाह पसंद धान की कीमत 9–10 हजार रुपये प्रति क्विंटल रहती है, जबकि इसका चावल बाजार में 120–150 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता है. एक एकड़ खेत में लगभग 12 से 15 क्विंटल बादशाह पसंद धान का उत्पादन होता है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है.

रायबरेली के शिवगढ़ क्षेत्र के केशरखेड़ा गांव के प्रगतिशील किसान रोशन वर्मा बताते हैं कि बादशाह पसंद चावल बहुत प्रसिद्ध है. उनके अनुसार, पूर्वजों के मुताबिक यह चावल राजा-महाराजाओं की पहली पसंद हुआ करता था, इसी वजह से इसे “बादशाह पसंद” का नाम मिला.

रोशन वर्मा बताते हैं कि लोग बादशाह पसंद चावल को खूब पसंद करते हैं, क्योंकि यह खाने में सुगंधित होने के साथ-साथ आम चावल की तुलना में ज्यादा खुशबूदार होता है. वह लगभग 2 एकड़ जमीन में इसी चावल की खेती करते हैं.

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रायबरेली का बादशाह पसंद चावल, क्यों इसे कहते हैं चावल का राजा? जानिए वजह


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