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जैसे ही सर्दियों की शुरुआत होती है, भारतीय रसोई अपने आप ऐसे व्यंजनों की ओर मुड़ जाती है जो शरीर को अंदर से गर्म रखें. इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में गोंद के लड्डू सबसे खास माने जाते हैं.
जैसे ही सर्दियों की शुरुआत होती है, भारतीय रसोई अपने आप ऐसे व्यंजनों की ओर मुड़ जाती है जो शरीर को अंदर से गर्म रखें. इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में गोंद के लड्डू सबसे खास माने जाते हैं. दादी-नानी के नुस्खों, डिलीवरी के बाद की देखभाल और बचपन की सर्दियों से जुड़े ये लड्डू सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि एक तरह का फंक्शनल फूड हैं, जो ठंड के मौसम में शरीर को मजबूती और सुरक्षा देते हैं.
पलामू जिले के आयुर्वेद के जानकर शिव कुमार पांडे ने बताया कि गोंद, जिसे खाने वाला गोंद भी कहा जाता है, बबूल के पेड़ से प्राप्त होता है. जब इसे घी में तला जाता है, तो यह फूलकर हल्का और कुरकुरा हो जाता है, जिससे यह आसानी से पचता है. आयुर्वेद और पारंपरिक घरेलू ज्ञान में गोंद को ताकत बढ़ाने वाला माना गया है. इसकी गर्म तासीर सर्दियों में शरीर की जकड़न, कमजोरी और ठंड से बचाने में मदद करती है.
आगे कहा कि गोंद के लड्डू खाने वाला गोंद, शुद्ध घी, गेहूं का आटा और सूखे मेवों से बनाए जाते हैं. इनमें सोंठ और इलायची जैसे मसाले मिलाए जाते हैं, जो शरीर को गर्म रखने के साथ पाचन में भी सहायक होते हैं. ये सभी तत्व मिलकर शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा देते हैं और लंबे समय तक एक्टिव बनाए रखते हैं.
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आगे कहा कि गोंद के लड्डू बनाना कठिन नहीं है. सबसे पहले घी में गोंद को धीमी आंच पर तलकर कुरकुरा किया जाता है और हल्का कूट लिया जाता है. उसी घी में गेहूं का आटा सुनहरा होने तक भूनते हैं. फिर इसमें कटे बादाम, काजू, मगज, सूखा नारियल और कुटा हुआ गोंद मिलाया जाता है. आंच बंद कर मिश्रण थोड़ा ठंडा होने पर गुड़ या चीनी, सोंठ और इलायची मिलाकर गरम-गरम लड्डू बांध लिए जाते हैं. इन्हें एयरटाइट डिब्बे में लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है.
आगे कहा कि गोंद के लड्डू शरीर की ताकत और सहनशक्ति बढ़ाने में मदद करते हैं. बीमारी, कमजोरी या प्रसव के बाद महिलाओं को ये लड्डू इसलिए दिए जाते हैं क्योंकि ये लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करते हैं. इनकी गर्म तासीर सर्दियों में शरीर को अंदर से गर्म रखती है. गोंद और मेवों में मौजूद पोषक तत्व जोड़ों और हड्डियों को मजबूती देते हैं और सर्दियों में होने वाले दर्द से राहत दिलाते हैं.
उन्होंने कहा कि हालांकि गोंद के लड्डू भारी माने जाते हैं, लेकिन सोंठ और इलायची जैसे मसाले इनके पाचन को आसान बनाते हैं. ये लड्डू तुरंत नहीं, बल्कि धीरे-धीरे ऊर्जा देते हैं, जिससे सर्दियों की थकान और सुस्ती कम होती है.
उन्होंने कहा कि रोज एक गोंद का लड्डू पर्याप्त होता है. इन्हें मिठाई की तरह नहीं, बल्कि पोषण देने वाले घरेलू टॉनिक की तरह खाना चाहिए. कभी-कभी सबसे कारगर हेल्थ फॉर्मूला वही होता है, जो पीढ़ियों से हमारी दादी-नानी की रेसिपी में सुरक्षित चला आ रहा है.
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https://hindi.news18.com/photogallery/lifestyle/recipe-winter-season-special-food-eat-gond-laddu-as-treasure-of-health-local18-ws-l-9976071.html
