Home Food Bihar Famous Foods : सिर्फ लिट्टी चोखा ही नहीं, बिहार के ये...

Bihar Famous Foods : सिर्फ लिट्टी चोखा ही नहीं, बिहार के ये 7 टेस्‍टी फूड्स भी हैं दुनियाभर में फेमस, मिल चुका है GI-टैग

0
1


Bihar Traditional GI Foods : अगर आपको लगता है कि बिहार का स्वाद सिर्फ लिट्टी-चोखा तक ही सीमित है, तो आपको यहां के स्‍वाद को चखने और एक्‍सप्‍लोर करने की जरूरत है. दरअसल, आपको बता दें कि बिहारी खाने की चीजें में 7 ऐसी अनमोल चीजें हैं जिन्हें GI-टैग मिला है. जीआई टैग यानी असली स्वाद सिर्फ बिहार की मिट्टी में ही बसता है. ये चीजें बिहार की परंपरा, संस्कृति और सदियों पुरानी कारीगरी की खुशबू का प्रतीक भी हैं. ये GI-टैग वाले फूड्स साबित करते हैं कि बिहार की ये चीजें सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि परंपरा, मेहनत और मिट्टी की महक का अद्भुत मेल है. अगली बार जब बिहार जाएं या बिहार के फूड्स की बात करें, तो लिट्टी-चोखा के साथ इन नायाब रत्नों को ज़रूर याद रखें, क्योंकि असली बिहार इसी में बसता है.

1.भागलपुरी जर्दालू आम-
भागलपुर का जर्दालू आम अपनी अनोखी महक, पतले छिलके और बैलेंस्‍ड मिठास के लिए पूरे देश में मशहूर है. ‘जर्दालू’ नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह जल्दी पीला होने लगता है. इसकी खासियत के चलते हर साल बिहार सरकार इसे VIPs तक भेजती है. यह आम अपने आप में बिहार का “फ्रूट किंग” है.

2.कतरनी चावल-
कतरनी चावल भागलपुर और बांका की उपज है. पकते ही इसकी तेज़ सुगंध पूरे घर को महका देती है. इसका दाना छोटा और हल्का मुड़ा हुआ होता है. पुराने ज़माने में इसे केवल त्योहारों और खास मौकों पर पकाया जाता था. इसकी महक और स्वाद इसे सामान्य चावल से काफी अलग बना देता है.

3.सिलाव का खाजा-
नालंदा के सिलाव का खाजा बिहार की सबसे पुरानी और नाज़ुक मिठाइयों में से एक है. पतली-पतली परतों को तलकर और चाशनी में डुबोकर बनने वाली यह मिठाई मुंह में जाते ही पिघल जाती है. इसे बनाना एक तरह की कला है, जो पीढ़ियों से चली आ रही है.
4.मगही पान-
मगध क्षेत्र का मगही पान अपनी कोमल पत्ती और हल्की मीठी सुगंध के लिए जाना जाता है. यह न सिर्फ़ स्वादिष्ट है, बल्कि बिहार की परंपरा और मेहमाननवाज़ी का हिस्सा भी है. GI-टैग मिलने के बाद इसकी पहचान और मजबूत हो गई है.

5.मिथिला मखाना-
मिथिला क्षेत्र का मखाना पूरे देश में मशहूर है और भारत में इसका सबसे ज्यादा उत्पादन बिहार में होता है. हल्का, कुरकुरा और पोषक तत्वों से भरपूर मखाना उपवास से लेकर हर रोज़ की डाइट तक में इस्तेमाल होता है. प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर यह बिहार की शान है.

6.शाही लीची-
मुजफ्फरपुर की शाही लीची अपनी रसीली फांकों, छोटे बीज और शानदार मिठास के लिए खास पहचान रखती है. गर्मियों का इंतज़ार लोग सिर्फ इस लीची के लिए करते हैं. देश-विदेश में इसकी भारी मांग रहती है, और इसलिए इसे “क्वीन ऑफ लिचीज़” भी कहा जाता है.

7.मर्चा चावल-
पश्चिम चंपारण का मर्चा चावल अपने छोटे, गोल दाने की वजह से ‘मिरचा राइस’ कहलाता है. इसकी खुशबू इतनी तेज होती है कि आप पहचान जाएंगे. इससे बनने वाला चूड़ा बेहद कुरकुरा और स्वादिष्ट होता है. यह दुर्लभ किस्म अब GI-टैग के जरिए अपनी पहचान बचाए रखेगी.

क्‍या है जीआई टैग?
GI-टैग यानी Geographical Indication Tag (भौगोलिक संकेतक टैग). यह किसी खास जगह की विशिष्ट पहचान वाली चीज़ को दिया जाने वाला एक तरह का अधिकार या प्रमाणपत्र होता है. कुछ चीजें सिर्फ एक खास जगह पर ही अपने असली स्वाद, गुणवत्ता, तकनीक या परंपरा के साथ बन सकती हैं. जैसे—दार्जिलिंग चाय, बनारसी साड़ी, मैसूर रेशम आदि.

GI-टैग यह बताता है कि यह प्रोडक्ट उसी जगह का असली और ओरिजिनल है, कोई दूसरी जगह वही चीज़ बनाकर उसी नाम से बेच नहीं सकती, इससे उस इलाके के किसानों, कारीगरों और स्थानीय उद्योग को पहचान और आर्थिक लाभ मिलता है. सीधे शब्दों में कहें तो GI-टैग किसी चीज़ का “मूल स्थान प्रमाण पत्र” होता है, जो उसे नकल से बचाता है और उसकी खासियत को दुनिया के सामने साबित करता है.


.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.

https://hindi.news18.com/news/lifestyle/recipe-bihar-traditional-gi-tagged-foods-7-unique-cuisine-gems-more-special-than-litti-chokha-jardalu-mango-shahi-litchi-mithila-makhana-ws-el-9861547.html

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version