Sonam Kapoor Second Pregnancy: बॉलीवुड की स्टाइलिश और खूबसूरत एक्ट्रेस सोनम कपूर एक बार फिर सुर्खियों में हैं. खबर है कि वह दूसरी बार मां बनने वाली हैं. बता दें कि, सोनम कपूर और आनंद आहूजा ने सालों की डेटिंग के बाद मई 2018 में शादी की थी. शादी के 4 साल बाद कपल ने साल 2022 में बेटे वायु का वेलकम किया था. मां बनने के बाद सोनम अक्सर अपनी मदरहुड जर्नी फैंस संग शेयर करती हैं. अब एक्ट्रेस की जिंदगी में एक बार फिर नन्हे मेहमान की एंट्री होने वाली है. 2022 में हुए पहले बच्चे के बाद इस प्रेग्नेंसी को 3 साल से अधिक का समय हो जाएगा. डॉक्टर्स की मानें तो, एक्ट्रेस ने फैमिली प्लानिंग के तहत लिया गैप एकदम सही है. इससे मां और बच्चे को कोई गलत प्रभाव नहीं होगा. अब सवाल है कि आखिर, दो बच्चों के बीच में परफेक्ट गैप क्या है? एक परफेक्ट फैमिली प्लानिंग क्या है? दो बच्चों के बीच गैप जरूरी क्यों है? इस बारे में Bharat.one को बता रही हैं नोएडा की सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मीरा पाठक-
इस साल अगस्त में जब वायु तीन साल का हुआ, तो सोनम ने उसके लिए इमोशनल बर्थडे पोस्ट शेयर किया था. उन्होंने लिखा था- ‘हैप्पी बर्थडे माय बेबी बॉय. तुम हमेशा जिज्ञासु, दयालु और प्यारे बने रहो. तुम्हें हमेशा ढेर सारा प्यार, म्यूजिक और खुशी मिले. मम्मा तुम्हें बहुत प्यार करती है.’ वहीं, नानू अनिल कपूर ने भी उस मौके पर खुशी जताई थी. उन्होंने लिखा था, ‘वायु, जैसे ही तुम हमारी जिंदगी में आए, तुमने सबका दिल खुशी और प्यार से भर दिया. तुम्हें देखकर पूरा परिवार गर्व महसूस करता है.’
दो बच्चों के बीच कितना गैप जरूरी
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक दो बच्चों की उम्र के बीच कम से कम 2 साल का गैप होना चाहिए. डॉ. पाठक के मुताबिक, 3 साल का गैप रखेंगे तो और बेहतर है. भारत सरकार भी अपनी कई स्कीमों में एक महिला के एक स्वस्थ मां बनने के लिए दो बच्चों की उम्र में कम से कम तीन साल के गैप की बात करती है. हालांकि, यह कोई लक्ष्मण रेखा नहीं है. क्योंकि, समय बदल रहा है. लोगों की सोच बदल रही है. प्राथमिकताएं बदल रही हैं. ऐसे में आप भी अपनी जरूरत के अनुसार भी कप्लीट फैमिली प्लानिंग कर सकते हैं.

दो बच्चों में गैप लेना जरूरी क्यों
– डॉक्टर की मानें तो, प्रेग्नेंसी के दौरान एक महिला को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इसलिए दो बच्चों के बीच गैप लेना बेहद जरूरी है. गैप इसलिए भी, ब्रेस्ट फीडिंग के कारण महिला का शरीर कमजोर हो जाता है. ब्रेस्ट फीड़िंग कराने से प्रेग्नेंसी के बाद एक मां के आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम और कैल्शियम के लेवल कम हो जाते हैं. ऐसी स्थिति में मां को एनीमिया और बच्चे को बर्थ डिफेक्ट्स होने के जोखिम बढ़ सकते हैं.
– दूसरा, यूट्रस को रिकवर होने में टाइम लगता है.ऐसे में अगर कोई महिला 2 साल से पहले प्रेग्नेंट हो भी जाती है तो एंडोमेट्रियल लाइनिंग की रिकवरी काफी इफेक्टिव होती है. ऐसी स्थिति होने से मिस कैरेज की चांसेस बढ़ जाते हैं. प्लेसेंटा की अटैचमेंट एबनॉर्मल हो जाती है. इसके अलावा, यदि पहला बच्चा आपरेशन से हुआ है तो यूट्राइन रप्चर (गर्भाशय का फटना) का भी खतरा बढ़ सकता है.
– तीसरा, मौजूदा वक्त में कई ऐसे कपल हैं जो कम समय में अपनी कंप्लीट फैमिली प्लानिंग कर लेना चाहते हैं. उन्हें करियर में आगे बढ़ना होता है. वह चाहते हैं कि साल-डेढ़ साल के भीतर दो बच्चे या फिर जुड़वा बच्चे लेकर उनका पालन पोषण कर लिया जाए. इससे दोनों बच्चों का पालन पोषण एक साथ हो जाएगा. उनका खर्च और समय दोनों बचेगा. फिर दोनों बच्चों के बीच एक अच्छी बॉन्डिंग बनेगी. वह एक दूसरे के सिब्लिंग से ज्यादा दोस्त बनकर बड़े होंगे.
– चौथा, कई बार ये भी देखा गया है कि, दो साल से पहले प्रेग्नेंसी होने से बच्चे के विकास पर भी असर पड़ सकता है. क्योंकि, उनको सही से पोषण नहीं मिल पाता है. क्योंकि, मां पहले से ही एक बच्चे पर ध्यान दे रही होती है. डॉक्टर की मानें तो किसी भी बच्चे को कम से कम दो साल ब्रेस्ट फीडिंग कराना चाहिए. ऐसा करने से बच्चे की इम्युनिटी बेहतर होगी.
– रिसर्च भी ये सुझाव देते हैं कि दो बच्चों के बीच 27 से 32 महीने का गैप उनके स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है. इससे मां और बच्चे दोनों की सेहत अच्छी रहती हैं. डॉ. मीरा आगे यह भी कहती है कि दो बच्चों के बीच जितना कम एज गैप होगा उनके बीच लड़ाइयां उतनी अधिक होती है. लेकिन, इसके साथ उनको कई फायदे होते हैं. वे एक दूसरे के बहुत करीब होते हैं. उनके बीच कई पॉजिटिव सोशल स्कील डेवलप होता है.
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-actress-sonam-kapoor-second-pregnancy-reveals-family-planning-with-second-pregnancy-ws-kln-9686557.html