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कैंसर को मात देने वाली महिला की प्रेरणादायक कहानी, जानें कैसे मिली जीत

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हमारे देश में कैंसर के मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है. खासकर उत्तर-पूर्व में इसकी दर में काफी इज़ाफ़ा हुआ है. लेकिन कैंसर का कारण क्या है? डॉक्टरों का मानना है कि समाज में जागरूकता की कमी इसका मुख्य कारण है. इसी विषय पर आज हम आपको गुवाहाटी की एक साहसी महिला से मिलवाना चाहते हैं, जिन्होंने घातक कैंसर से लड़कर विजय पाई है. ये साहसी महिला शिलपुखुरी की बिष्णुकुमारी शइकिया हैं.

बिष्णुकुमारी का कैंसर से संघर्ष
साल 2020 में उन्हें जीभ का कैंसर हुआ. उस समय कोविड भी एक बड़ी चुनौती थी. उस भयंकर स्थिति में भी बिष्णुकुमारी ने बिना डरे हिम्मत के साथ कैंसर का सामना किया. वे बचपन से ही योग करती थीं और बैडमिंटन, टेबल टेनिस जैसे खेलों में भी रुचि रखती थीं, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा. उन्होंने बताया कि ऐसे रोग में हमेशा सकारात्मक सोच रखनी चाहिए और खुश रहना चाहिए. ऐसा महसूस करना चाहिए जैसे कैंसर है ही नहीं. इस स्थिति में परिवार का सहयोग अहम होता है, और परिवार के हर सदस्य को साथ देना चाहिए.

परिवार और समाज का समर्थन
बिष्णुकुमारी को उनके परिवार ने सकारात्मक सहयोग दिया. उन्होंने कभी महसूस नहीं होने दिया कि वह किसी बीमारी से जूझ रही हैं. साथ ही, उन्होंने बताया कि समाज का भी इसमें दायित्व है. समाज को भी कैंसर मरीजों का साथ देना चाहिए. कई लोग कैंसर को संक्रामक रोग मानते हैं, जो कि एक गलत धारणा है. डॉक्टरों का कहना है कि कैंसर मरीजों को नफरत की नजर से नहीं देखना चाहिए. मानसिक रूप से मज़बूत बनाने के लिए उन्हें सहारा देना जरूरी है.

समाज में जागरूकता और बिष्णुकुमारी की आगे की लड़ाई
केवल यही बिष्णुकुमारी का संघर्ष नहीं था. उनकी एक और कठिन लड़ाई थी. वह दो बेटियों की मां हैं. कैंसर का ऑपरेशन कराने के लगभग एक साल बाद उनके पति का निधन हो गया, जिससे वे टूट गईं. लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने जीवन की इस लड़ाई को जारी रखा. उनका कहना है कि कैंसर मरीज की देखभाल में पांच साल का समय लगता है. अब वे पाँच साल पूरे कर चुकी हैं और पूरी तरह से स्वस्थ हैं.


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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-cancer-survivor-story-cancer-battle-inspiration-for-patients-positive-thinking-sa-local18-8817824.html

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