ये नए नतीजे 2022 की स्टडी को आगे बढ़ाते हुए सामने आए हैं. उस स्टडी में साइंटिस्ट्स ने पहले चूहों में पैनक्रियाज की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को खत्म किया, जिससे उनमें डायबिटीज़ दिखाई देने लगी. इसके बाद उन्होंने स्टेम सेल्स और आइलैट कोशिकाओं को ट्रांसप्लांट किया और फिर शुगर का कंट्रोल देखा.
इस स्टडी में पाया गया कि 19 में से 19 चूहों में टाइप 1 डायबिटीज़ नहीं देखी गई. वहीं, लंबे समय से टाइप 1 डायबिटीज़ से ग्रस्त एक अन्य ग्रुप के 9 में से 9 चूहे पूरी तरह ठीक हो गए. क्योंकि इस्तेमाल की गई एंटीबॉडीज़, दवाएँ और कम-खुराक रेडिएशन पहले से ही क्लीनिकल प्रैक्टिस का हिस्सा हैं, रिसर्चर्स इस रणनीति को ह्यूमन ट्रायल की दिशा में अगला कदम मानते हैं.
डायबिटिज और आर्गन ट्रांसप्लांट के देश में मामले
द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी में पब्लिश एक नई मॉडलिंग स्टडी के नतीजों के अनुसार, 2021 में दुनिया भर में अनुमानित 84 लाख लोग टाइप 1 डायबिटीज के साथ जी रहे थे. साल 2040 तक यह संख्या बढ़कर 1.35 करोड़ से 1.74 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है.
नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत में एक साल में दर्ज किए जाने वाले ऑर्गन ट्रांसप्लांट की संख्या तीन गुना से अधिक हो गई है. इनमें किडनी ट्रांसप्लांट की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है.
साल 2023 में भारत में कुल 18,378 ट्रांसप्लांट किए गए. इससे देश ऑर्गन ट्रांसप्लांट के मामले में दुनिया में तीसरे और कॉर्निया (आँखों) ट्रांसप्लांट में दूसरे स्थान पर है.
इस डेटा के अनुसार, 2023 में किडनी ट्रांसप्लांट की संख्या 13,426 रही. लीवर ट्रांसप्लांट 4,491, हार्ट ट्रांसप्लांट 221, लंग ट्रांसप्लांट 197 और पैंक्रियाज ट्रांसप्लांट 27 दर्ज किए गए.
डायबिटीज़ से आगे भी, रिसर्चर्स को उम्मीद है कि यह थेरेपी रूमेटॉइड अर्थराइटिस, ल्यूपस जैसी ऑटोइम्यून बीमारियों और सिकल सेल एनीमिया जैसे गैर-कैंसर ब्लड रोगों में भी इलाज के नए रास्ते खोल सकती है.
क्या इसमें चुनौतियां
हालाँकि नतीजे उत्साहजनक हैं, इस रणनीति को बड़े स्तर पर अपनाने से पहले कई बाधाएँ हैं. फिलहाल आइलैट कोशिकाएँ केवल मृत डॉनर से मिलती हैं. ऐसे में ब्लड स्टेम सेल्स भी उसी दाता से लेनी होती हैं. यह भी साफ नहीं है कि एक डॉनर से मिलने वाली आइलैट कोशिकाएँ हर बार टाइप 1 डायबिटीज़ को पलट पाएँगी या नहीं.
इन बाधाओं को दूर करने के लिए साइंटिस्ट लगातार कोशिश कर रहे हैं. लैब में मानव प्लुरिपोटेंट स्टेम कोशिकाओं से बड़ी मात्रा में आइलैट सेल्स बनाने या ट्रांसप्लांट के बाद उनकी उम्र और क्षमता बढ़ाने के तरीके खोजे जा रहे हैं.
स्टैनफोर्ड डायबिटीज़ रिसर्च सेंटर और नॉर्दर्न कैलिफ़ोर्निया ब्रेकथ्रू T1D सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस के डायरेक्टर किम इस स्टडी के वरिष्ठ लेखक हैं. यह शोध 18 नवंबर को जर्नल ऑफ क्लीनिकल इनवेस्टिगेशन में ऑनलाइन पब्लिश हुआ. ग्रेजुएट और मेडिकल स्टूडेंट प्रेक्षा भगचंदानी इस स्टडी की मुख्य लेखिका हैं.
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-therapy-eliminate-diabetes-type-1-and-also-open-new-avenues-for-organ-transplantation-sjn-9906986.html
