मुंबई. रक्तदान को समाज में महादान माना जाता है, क्योंकि एक व्यक्ति द्वारा दिया गया रक्त किसी दूसरे व्यक्ति को नया जीवन दे सकता है. चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार एक स्वस्थ व्यक्ति का रक्तदान न केवल जरूरतमंदों के लिए जीवनरक्षक होता है, बल्कि यह डोनर के स्वयं के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है. यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित होती है और सही दिशा निर्देशों का पालन करने पर इसमें किसी प्रकार के संक्रमण का खतरा नहीं रहता.
रक्तदान से पहले पर्याप्त नींद लेना और हल्का भोजन करना बेहद जरूरी होता है, ताकि शरीर में आवश्यक ऊर्जा बनी रहे. इसके बावजूद रक्तदान को लेकर समाज में कई भ्रांतियां और गलत धारणाएं प्रचलित हैं. कुछ जरूरी पहचान संबंधी नियम और स्वास्थ्य मानक भी ऐसे हैं, जिनकी जानकारी न होने के कारण कई लोग रक्तदान से हिचकते हैं. रक्तदान से जुड़ी हर छोटी से छोटी जानकारी देने के लिए हमने मुंबई के प्रतिष्ठित कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की कंसल्टेंट डॉ. शीनम ठक्कर से बातचीत की.
रक्तदान के दौरान किन बातों का रखें ध्यान
डॉ. शीनम ठक्कर रक्तदान के महत्व और इससे जुड़ी बारीकियों को विस्तार से समझाती हैं. Bharat.one से बातचीत में उन्होंने बताया कि रक्तदान केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक और सुरक्षित प्रक्रिया है, जिसे सही जानकारी के साथ किया जाना चाहिए. रक्तदान करने वाला व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ होना चाहिए.
रक्तदान से पहले डोनर का पर्याप्त नींद लेना अनिवार्य है और कम से कम चार घंटे पहले हल्का भोजन किया होना चाहिए. डोनर ने शराब का सेवन नहीं किया हो और वह किसी भी प्रकार के नशे की स्थिति में नहीं होना चाहिए. जिस बाजू से रक्त लिया जाना है, उस पर किसी भी तरह का घाव, संक्रमण या त्वचा रोग नहीं होना चाहिए. सुरक्षा की दृष्टि से यह भी जरूरी है कि पिछले छह महीने के भीतर टैटू या बॉडी पियर्सिंग न करवाई गई हो.
रक्तदान के लिए जरूरी आयु और स्वास्थ्य मानक
रक्तदान के लिए आयु सीमा तय की गई है. डोनर की उम्र 18 से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए. वजन के मानकों की बात करें तो होल ब्लड डोनेशन के लिए न्यूनतम 45 किलो और प्लेटलेट अफेरेसिस के लिए कम से कम 50 किलो वजन होना जरूरी है.
इसके साथ ही डोनर का हीमोग्लोबिन स्तर 12.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर से अधिक होना चाहिए. सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 100 से 140 एमएमएचजी के बीच होना आवश्यक है. डॉ. ठक्कर बताती हैं कि दवाइयों से नियंत्रित डायबिटीज के मरीज रक्तदान कर सकते हैं, लेकिन इंसुलिन पर निर्भर डायबिटीज मरीज रक्तदान के योग्य नहीं माने जाते. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रक्तदान के दौरान किसी प्रकार के इन्फेक्शन या स्थायी कमजोरी का कोई खतरा नहीं होता.
रक्तदान के प्रकार और बाद की सावधानियां
रक्तदान केवल एक प्रकार का नहीं होता, बल्कि इसके चार प्रमुख प्रकार होते हैं. पहला होल ब्लड डोनेशन, जिसमें सामान्य रूप से रक्त लिया जाता है. दूसरा प्लेटलेट अफेरेसिस, जिसमें प्लेटलेट्स निकाले जाते हैं और लाल रक्त कोशिकाएं डोनर को वापस लौटा दी जाती हैं. तीसरा प्लाज्मा फेरेसिस, जिसमें केवल प्लाज्मा लिया जाता है. चौथा ग्रानुलोसाइट अफेरेसिस, जिसमें केवल ग्रानुलोसाइट्स निकाले जाते हैं.
रक्तदान के बाद की सावधानियां भी उतनी ही जरूरी हैं. डोनर को कम से कम 15 से 20 मिनट तक आराम करना चाहिए और अधिक मात्रा में पानी या जूस पीना चाहिए. रक्तदान के तुरंत बाद भारी शारीरिक श्रम, जिम वर्कआउट, ऊंचाई पर चढ़ना या लंबी दूरी की ड्राइविंग से बचना चाहिए. नियमित अंतराल की बात करें तो पुरुष हर तीन महीने में और महिलाएं हर चार महीने में सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकती हैं.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-avoid-these-mistakes-before-and-after-blood-donation-doctors-shares-important-tips-local18-ws-kl-10126504.html
