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30+ उम्र की महिलाओं में प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम का जोखिम अधिक, डॉक्टर से जानें लक्षण, इलाज और बचाव के उपाय

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Premenstrual Syndrome: प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम महिलाओं में मासिक धर्म पूर्व की परेशानी है, जो 30 की उम्र में अधिक होती है. लक्षणों में सूजन, सिरदर्द, मूड स्विंग्स शामिल हैं. इलाज में डॉक्टर की सलाह और जीवनशैली…और पढ़ें

30+ उम्र की महिलाओं में प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम का जोखिम अधिक, जानें लक्षण

डॉक्टर से जानिए प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम के लक्षण और बचाव के उपाय. (Canva)

हाइलाइट्स

  • महिलाओं में PMS के लक्षणों में सूजन, सिरदर्द, मूड स्विंग्स शामिल हैं.
  • 30 की उम्र के आसपास महिलाओं में PMS का जोखिम अधिक होता है.
  • PMS के इलाज में डॉक्टर की सलाह और जीवनशैली में बदलाव मददगार हैं.

Premenstrual Syndrome: महिलाओं में मासिक धर्म पूर्व या प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम बहुत ही सामान्य परेशानी है. यह शारीरिक, भावनात्मक और व्यवहार संबंधी लक्षणों का एक ऐसा समूह है, जो डिंबोत्सर्जन (ओव्यूलेशन) के दौरान विकसित होता है. इसके लक्षण 30 की उम्र के आसपास की महिलाओं में नजर आते हैं. यह हर महीने मासिक धर्म के चक्र के अंतिम भाग में होता है. इससे रोजमर्रा की जिंदगी और गतिविधियों पर भी प्रभाव पड़ता है.

डॉक्टर के मुताबिक, पीएमएस (PMS) के लक्षण अलग-अलग महिलाओं में भिन्न हो सकते हैं. ऐसा ज्यादातर पीरियड्स के दौरान उनके हार्मोन में बदलाव होने के कारण होते हैं. 70% से अधिक महिलाओं का कहना है कि उन्हें मासिक धर्म पूर्व के कुछ लक्षण जैसे सूजन, सिरदर्द और मूड में बदलाव के संकेत मिलते हैं. कुछ महिलाओं के लिए तो ये साइड एफेक्ट्स इस हद तक गंभीर हो सकते हैं कि वे किसी भी काम को करने, ऑफिस-कॉलेज जाने में भी खुद को असमर्थ पाती हैं. अब सवाल है कि आखिर प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम क्या है? प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम कैसे करें कम और क्या है इलाज? इस बारे में Bharat.one को बता रही हैं राजकीय मेडिकल कॉलेज कन्नौज में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की गायनेकोलॉजिस्ट एवं सर्जन डॉ. शिखा भारती-

क्या है प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम

प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) एक तरह का विकार है जिसमें शारीरिक और भावनात्मक लक्षण दिखते हैं. ये लक्षण मासिक धर्म शुरू होने से पहले के दिनों में दिखते हैं. पीएमएस को प्रीमेंस्ट्रुअल टेंशन (PMT) भी कहा जाता है.

30 पार वाली महिलाओं में अधिक

डॉ. शिखा भारती कहती हैं कि इन सभी बातों पर विचार किया जाए, तो 30 की उम्र के आस-पास की महिलाओं को पीएमएस या प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम होने की संभावना अधिक होती है. यदि इस पर ठीक से ध्यान न दिया जाए, तो यह जीवन के स्तर और मानसिक हालत को गंभीर रूप से बदल सकता है. इसका सबसे खतरनाक हिस्सा भावनात्मक लक्षण हैं, जो अति-संवेदनशीलता, मूड में अत्यधिक परिवर्तन, क्रोध, चिड़चिड़ापन और चिंता, डिप्रेशन के रूप में प्रकट होते हैं, जो पीरियड्स से पहले और उसके दौरान बिगड़ जाते हैं.

प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम का इलाज

डॉक्टर के मुताबिक, यदि पीएमएस अधिक गंभीर हो जाता है और रक्तस्राव या ब्लीडिंग बंद नहीं होती है, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेने और ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी जाती है. ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड तब किया जा सकता है, जब आपका मासिक धर्म चल रहा हो. इसका आपके पीरियड्स पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. हालांकि, आपको समय से पहले अपना टैम्पोन (स्त्राव रोकने वाला अवरोध) हटा देना चाहिए. स्त्रीरोग विशेषज्ञ पीएमएस लक्षणों को कम करने के लिए आपको उपयुक्त दवाएं और उपचार लिख सकती हैं.

पीएमएस के जोखिम को कम करने के तरीके

  • धूम्रपान से दूर रहने से आप एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन, एन्ड्रोजन और गोनाडोट्रोपिन के स्तर में होने वाले बदलाव से तुरंत बच सकती हैं, जो पीएमएस के इटियोलॉजी में शामिल हैं.
  • पीएमएस के अत्यधिक जोखिम को कम करने के लिए एक्सरसाइज करें, शरीर का आदर्श वजन बनाए रखें, तनाव से बचें और शराब का सेवन कम करें.
  • पौष्टिक भोजन का सेवन शरीर के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि इसे आसानी से पचाया और शरीर द्वारा इसे उपयोग में लाया जा सकता है.
  • हर रात 7 से 9 घंटे नींद जरूर लें, ताकि कमजोरी को कम करने में मदद मिल सके.
  • मासिक धर्म पूर्व के समय में योग करने से इसके लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है. एक योग विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही योगाभ्यास करें.

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30+ उम्र की महिलाओं में प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम का जोखिम अधिक, जानें लक्षण


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