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Blood Test for Biological Age: वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद से एक एक टूल तैयार किया है जिसमें किसी व्यक्ति की बायलॉजिकल उम्र का पता लगाया जा सकता है. इसके लिए सिर्फ 5 बूंद खून का सैंपल लिया जाता…और पढ़ें

बायलॉजिकल एज को कैसे जानें.
Blood Test for Biological Age: अक्सर कहा जाता है कि एज जस्ट ए नंबर यानी उम्र सिर्फ एक नंबर है. किसी इंसान का व्यक्तित्व कितना जीवंत है वास्तव में वही उसकी उम्र है. इसे अगर बायलॉजी में कहे तो अगर शरीर के महत्वपूर्ण अंग लंग्स, लिवर, किडनी, हार्ट, स्किन आदि तंदुरुस्त रहते हैं तो उस व्यक्ति की उम्र बायलॉजिकली कम होती है. मतलब उसका उम्र बढ़ तो गया है लेकिन शरीर उसका जवान है. लेकिन इस बात का पता कैसे चलेगा. परंपरागत रूप से इसके लिए डीएन जांच की जाती है जिससे पता चलता है कि कोशिकाएं कितनी हेल्दी है. इसी आधार पर बायलॉजिकल उम्र का पता लगाया जाता है लेकिन अब वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के आधार पर एक सिंपल ब्लड टेस्ट से यह पता लगा लेगा कि किसी व्यक्ति की बायलॉजिकल उम्र क्या है.
22 स्टेरॉयड का परीक्षण
न्यूज मेडिकल लाइफ साइंस के मुताबिक जापान के ओसाका विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसी व्यक्ति की जैविक आयु का अनुमान लगाने के लिए एक नया एआई मॉडल विकसित किया है. यह जन्म से लेकर अब तक के वर्षों की गिनती करने के बजाय यह मापता है कि उनके शरीर की उम्र कितनी बढ़ गई है. इसके लिए खून की केवल पांच बूंदों का सैंपल लिया जाता है और इस सैंपल से नई विधि के तहत एआई की मदद से 22 प्रमुख स्टेरॉयड और उनकी अंतःक्रियाओं का विश्लेषण किया जाता है. इसी के आधार पर किसी व्यक्ति के बायलॉजिक उम्र का पता लगाया जाता है. इससे यह भी पता चलता है कि व्यक्ति के शरीर में महत्वपूर्ण अंग कितना हेल्दी है.
तनाव बायलॉजिकल उम्र बढ़ाने का प्रमुख कारक
वैज्ञानिकों ने इसके लिए डीएनएन यानी डीप न्यूरल नेटवर्क विकसित किया. इसमें स्टेरॉयड के मेटाबोलिज्म का पाथवे खोजा गया. फिर एआई की मदद से यह देखा गया कि अलग-अलग स्टेरॉयड के मॉल्यूक्यूल कोशिकाओं के साथ किस तरह से प्रतिक्रिया करती है. स्टेरॉयड हार्मोन का संबंध मेटाबोलिज्म, इम्यूनिटी और स्ट्रैस से जुड़ा हुआ है.स्टेरॉयड कोशिकाओं को कई तरह से प्रभावित करता है. यह गुड भी होता है और बैड भी. तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन कॉर्टिसोल भी स्टेरॉयड ही है. शोधकर्ताओं ने पाया कि जब कॉर्टिसोल का स्तर दोगुना हो जाता है तो जैविक आयु लगभग 1.5 गुना बढ़ जाती है. यानी अगर आप ज्यादा तनाव लेंगे तो जैव रासायनिक स्तर पर बुढ़ापे को तेज कर सकता है. तनाव के कारण शरीर का अंदरुनी अंग कमजोर हो जाता है जिससे बायलॉजिकल उम्र घट जाती है.
कई बीमारियों का पहले मिलेगा संकेत
इस अध्ययन से भविष्य में शरीर की बायलॉजिकल उम्र को कम करने की एक दिशा मिलती है. अगर टेस्ट में बायलॉजिकल उम्र प्रभावित होता है तो विभिन्न तरह के एहतियात और थेरेपी से इसमें सुधार लाया जा सकता है. इससे कोई भी व्यक्ति सतर्क होकर अपनी सेहत को सुधार कर सकता है. वहीं अगर पता चल जाए कि शरीर का कोई अंग कमजोर हो रहा है तो इसमें बीमारी होने से पहले इसे सही किया जा सकता है. इस तरह यह टेस्ट भविष्य में इंसान के लिए वरदान साबित हो सकता है.
March 17, 2025, 10:09 IST
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