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5 महीने के बच्चे की फूड पाइप में फंसी बैटरी, गले में फैला अल्सर, बाल-बाल बची जान

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अहमदाबाद सिविल अस्पताल में बैटरी निगलने के कारण 5 महीने बच्चे की सफल सर्जरी हुई. ये बिल्कुल भी आसान नहीं था. डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों को छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों या बैटरी से दूर रखना चाहिए क्योंकि समय पर इलाज न मिलने पर ये जानलेवा हो सकते हैं.

बच्चे खेलते वक्त किस सामान को मुंह में डाल लें, इसकी कोई गारंटी नहीं है. इसलिए छोटे बच्चे के आसपास छोटे आकार वाले सामान नहीं छोड़ना चाहिए. वरना ये एक छोटी सी गलती आपके बच्चे के लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है. हाल ही में अहमदाबाद सिविल अस्पताल पेरेंट्स की लापरवाही का एक ऐसा ही केस सामने आया है.

5 महीने के एक बच्चे ने खेलते वक्त बटन बैटरी को मुंह में डाल लिया था. इसका पता मां-बाप को भी उस समय लगा जब बच्चा हफ्ते भर खांसता रहा. जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टर ने समय रहते एक्स-रे करवाने की सलाह दी.

एक्स-रे में दिखा गले में फंसी बैटरी

कुछ दिन पहले खेलते हुए बच्चे ने गलती से एक बटन सेल (छोटा बैटरी) निगल लिया था. बच्चा लगातार खांसी करता रहा जिसके कारण उसके माता-पिता उसे एक निजी अस्पताल लेकर गए. वहां एक्स-रे करने पर पता चला कि बच्चे की भोजन नली में एक गोल वस्तु फंसी हुई है.

गले में फैला अल्सर

अहमदाबाद सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने पांच महीने  बच्चे के भोजन नली से एक बैटरी निकालने में सफलता हासिल की है. जांच में पाया गया कि बैटरी से निकलने वाले रसायन से बच्चे की भोजन नली के ऊपरी हिस्से में घाव (अल्सर) भी हो गए थे.

आसान नहीं थी सर्जरी

अस्पताल के ENT और बाल सर्जरी विभाग की टीम ने तुरंत एंडोस्कोपी प्रक्रिया की. डॉक्टरों ने कहा कि अगर समय पर बैटरी नहीं निकाली जाती तो रसायन के कारण भोजन नली में छेद हो सकता था और बच्चे की स्थिति गंभीर हो जाती. डॉ. राकेश जोशी, चिकित्सा अधीक्षक एवं बाल सर्जरी विभाग के प्रमुख ने बताया कि ये सर्जरी बिल्कुल भी आसान नहीं थी.

15 दिन बाद ठीक हुआ बच्चा

सर्जरी के बाद बच्चे को दवाईयां दी गई ताकि अल्सर ठीक हो सके. 15 दिनों बाद फॉलो-अप एंडोस्कोपी किया गया, जिसमें बच्चे की भोजन नली पूरी तरह ठीक होती नजर आयी

रिपोर्ट देख माता-पिता को आया याद

एक्स-रे रिपोर्ट को देखने के बाद माता-पिता को याद आया कि उनका बच्चा कुछ दिन पहले बटन बैटरी के साथ खेल रहा था. हालांकि वक्त पर जांच कराने से बच्चा पूरी तरह खतरे से बाहर है. लेकिन ये केस इस बात का उदाहरण है कि माता-पिता की लापरवाही किस तरह से बच्चे के जान को खतरे में डाल सकती है.

About the Author

शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर Bharat.one Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें

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5 महीने के बच्चे की फूड पाइप में फंसी बैटरी, डॉक्टर ने ऐसे बचायी जान


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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-small-battery-retrieved-5-month-old-baby-food-pipe-causing-ulcer-in-throat-ahmedabad-civil-hospital-dr-saved-life-ws-l-9908058.html

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