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Health Risks of Wood Burning Stoves Lung Damage Like Smoking | लकड़ी जलाने वाले स्टोव से फेफड़ों को बीड़ी सिगरेट जितना नुकसान


Last Updated:

Lung Damage from Wood Stoves: एक नई स्टडी में पता चला है कि सर्दियों के वक्त घरों में इस्तेमाल होने वाले लकड़ी जलाने वाले स्टोव फेफड़ों को सिगरेट के धुआं जितना नुकसान पहुंचा सकते हैं. इन स्टोव से निकलने वाला धुआं फेफड़ों में सूजन और सांस संबंधी बीमारियां पैदा करता है, जिससे फेफड़ों की कार्यक्षमता तेजी से घटती है.

वुड बर्निंग स्टोव फेफड़ों के लिए खतरनाक होते हैं.

Hidden Health Risks of Wood Stoves: सर्दियों के मौसम में अंगीठी जलाना बहुत कॉमन है. हमारे देश में ठंड से बचने के लिए बड़ी संख्या में लोग अंगीठी जलाते हैं, जबकि यूरोप और अमेरिका में घरों में एक वुड बर्निंग स्टोव बनाया जाता है, जो ठंड से राहत दिलाता है. लकड़ी जलाने वाले स्टोव घरों में एक आरामदायक और पारंपरिक हीटिंग विकल्प के रूप में देखे जाते हैं. हालांकि एक हालिया स्टडी में पता चला है कि लकड़ी जलाने वाले ये स्टोव धुएं के कारण फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इन स्टोव का धुआं बीड़ी, सिगरेट की तरह लंग्स को डैमेज कर रहा है.

द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक एम्स्टर्डम में यूरोपियन रेस्पिरेटरी सोसाइटी कांग्रेस में प्रजेंट की गई एक स्टडी में पाया गया कि लकड़ी जलाने वाले स्टोव का उपयोग करने वाले लोगों की फेफड़ों की क्षमता सामान्य लोगों की तुलना में तेजी से कम हो रही है. शोध के अनुसार लकड़ी जलाने से निकलने वाले सूक्ष्म कण फेफड़ों में सूजन पैदा करते हैं, जो सिगरेट के धुएं से होने वाले नुकसान के बराबर है. इस अध्ययन में आठ साल तक 8 लाख से अधिक लोगों के फेफड़ों के डाटा का विश्लेषण किया गया था.

एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि बच्चों और बुजुर्गों के लिए लकड़ी जलाने वाले स्टोव का धुआं सबसे ज्यादा खतरनाक है. बच्चों के फेफड़े अभी विकासशील अवस्था में होते हैं, जबकि बुजुर्गों की फेफड़ों की कार्यक्षमता पहले से कम हो सकती है. इसलिए इन दोनों आयु वर्ग में सांस संबंधी रोगों और एलर्जी की आशंका अधिक होती है. यूएस एनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी ने भी इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए कई लकड़ी जलाने वाले स्टोव पर प्रदूषण नियंत्रण नियम लागू किए हैं.

यूके जैसे विकसित देशों में भी लकड़ी जलाने वाले स्टोव का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. यूके में 2022 से 2024 के बीच इन स्टोव का उपयोग करने वाले घरों की संख्या 9.4% से बढ़कर 10.3% हो गई है. लोग इन्हें पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ विकल्प के तौर पर देखते हैं. हालांकि यह एक भ्रम है, क्योंकि ये स्टोव बहुत मात्रा में हानिकारक कण PM2.5 छोड़ते हैं, जो न केवल घर के अंदर बल्कि बाहर भी वायु प्रदूषण बढ़ाते हैं. ब्रिटेन में इस प्रकार का प्रदूषण वाहनों के मुकाबले 5 गुना अधिक है.

भारत जैसे विकासशील देशों में लोग खाना पकाने और हीटिंग के लिए लकड़ी और अन्य ठोस ईंधन का व्यापक रूप से उपयोग करते हैं, वहां फेफड़ों की बीमारियों का संबंध इन प्रदूषित धुआं से जोड़ा गया है. यूरोप और अमेरिका में हाल ही में यह शोध साबित कर रहा है कि उच्च आय वाले देशों में भी लकड़ी जलाने वाले स्टोव से होने वाले नुकसान कम नहीं हैं. ये स्टोव सिगरेट पीने के बराबर नुकसान पहुंचा सकते हैं, खासकर उन लोगों में जो स्वस्थ और नॉन-स्मोकर्स हैं.

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय Bharat.one Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

अमित उपाध्याय Bharat.one Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्… और पढ़ें

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इस तरह के स्टोव फेफड़ों के लिए खतरनाक, स्मोकिंग जितना पहुंचाते हैं नुकसान


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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-wood-burning-stoves-may-harm-lungs-like-smoking-new-study-warns-know-details-in-hindi-ws-e-9684959.html

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