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Health Tips: तीन पत्तियों वाला यह पौधा जिसे लोग खट्टी बूटी भी कहते हैं, आयुर्वेद में खास महत्व रखता है. इसमें विटामिन और मिनरल्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को पोषण देने के साथ-साथ लीवर, कब्ज और गैस जैसी समस्याओं में अचूक दवा का काम करते हैं.
सहारनपुर : हमारे आसपास गिलोय, तुलसी, नीम और एलोवेरा जैसे पौधे को तो हर कोई जानता है और अक्सर लोग इनका उपयोग भी करते हैं, लेकिन आयुर्वेद की दुनिया इससे कहीं आगे है. कई ऐसे पौधे हैं जिनके औषधीय गुण बेहद खास हैं, मगर जानकारी के अभाव में लोग उनका इस्तेमाल नहीं कर पाते. आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार शतावरी, शंखपुष्पी, ब्राह्मी और कालमेघ जैसे पौधे न केवल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं बल्कि पाचन, मानसिक स्वास्थ्य और महिलाओं की समस्याओं में भी लाभकारी होते हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इन अनजाने पौधों को सही तरीके से जीवन में शामिल किया जाए तो बड़ी बीमारियों से बचाव संभव है.
इन रोगों में कारगर
आयास आयुर्वेदिक चिकित्सालय के डॉ. हर्ष ने Bharat.one को बताया कि चांगेरी को आम बोलचाल में तीन पत्तियां कहा जाता है क्योंकि इसके हर पत्ते में तीन छोटी पत्तियां जुड़ी होती हैं। वहीं, इसके खट्टे स्वाद की वजह से लोग इसे खट्टी बूटी भी कहते हैं. चांगेरी का वैज्ञानिक नाम: Oxalis corniculata)है. यह औषधीय पौधा भारत के अधिकांश हिस्सों में पाया जाता है. इसे आयुर्वेद में दीपन-पाचन औषधि माना गया है. नियमित और नियंत्रित मात्रा में इसका उपयोग कब्ज, गैस, भूख न लगना और एसिडिटी जैसी समस्याओं में भी लाभकारी है.
न्यूट्रिशन बूस्टर है चांगेरी
चांगेरी का रस (स्वरस) घाव भरने में भी कारगर माना जाता है और इसे रोगियों को पिलाने से घाव जल्दी भर जाते हैं. इसमें विटामिन A, B और C के साथ कई तरह के मिनरल्स पाए जाते हैं, जो शरीर को पोषण प्रदान करते हैं. यही कारण है कि इसे न्यूट्रिशन बूस्टर माना जाता है. इसके अलावा कान संबंधी रोगों में भी चांगेरी लाभकारी साबित हुई है. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसकी सब्जी और चटनी बनाकर भी सेवन करते हैं.
मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें
मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु… और पढ़ें
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-use-of-changri-in-ayurveda-benefits-and-disadvantages-local18-9668862.html
