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Health News: सर्दी का मौसम शुरू होते ही ज्यादातर लोगों में जोड़ों के दर्द की समस्या देखने को मिलती है. सर्दी के मौसम में यह समस्या सबसे आम रहती है. दरअसल सर्दी के मौसम में शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने लगती है, जिससे इस तरीके की समस्या देखने को मिलती है. ऐसे में इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए कुछ घरेलू नुस्खा का भी उपयोग कर सकते हैं.
सर्दियों के मौसम में घुटनों और कमर में होने वाला दर्द सबसे अधिक परेशान करता है. यह समस्या ठंड के मौसम में अक्सर हर उम्र के लोगों में देखने को मिलती है. ठंडी बढ़ते ही लोगों के घुटनों शरीर के जोड़ों की हड्डियों में तेज दर्द उठने लगता है.
इस दर्द के पीछे का कारण शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने से होता है, जिसके कारण आमतौर पर लोगों के हाथ पैर के घुटनों और कमर के जोड़ में दर्द की समस्या उत्पन्न होती है. ऐसे में शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा को बैलेंस करना बेहद आवश्यक होता है.
आयुर्वेदिक दवाओं के सलाहकार डॉ. अमित सिंह बताते हैं कि यूरिक एसिड एक प्राकृतिक रसायन होता है, जो शरीर में यूरिन के टूटने से बनता है. सामान्य तौर पर किडनी के द्वारा यूरिक एसिड को फिल्टर करके बाहर निकाल दिया जाता है, लेकिन शरीर में यूरिन अधिक होने या किडनी की क्षमता कम होने से यूरिक एसिड की मात्रा खून में बढ़ने लगती है.
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शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा अधिक होने से जोड़ों में सूजन, दर्द, किडनी स्टोन जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं. ऐसे में इस शरीर में संतुलित करना बेहद आवश्यक होता है. यूरिक एसिड की मात्रा को कंट्रोल करने के लिए अपनी डेली डाइट में कुछ बदलाव करना बेहद आवश्यक होता है.
शरीर में यूरिक एसिड को बैलेंस करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि पानी का सेवन हमें दिन में ज्यादा करना चाहिए. इससे बॉडी हाइड्रेट रहती है. इसके अलावा अपने डाइट में कुछ हरी सब्जियों को ऐड करते हुए भी हम इसे बैलेंस कर सकते हैं.
यूरिक एसिड को सामान्य करने के लिए सर्दियों में बथुआ को अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है. यह एक ऐसा हर शक है, जिसमें प्राकृतिक रूप से शरीर को डिटॉक्स करने के गुण मौजूद होते हैं. यह शरीर में जमे हुए यूरिक एसिड को बाहर निकलने में मदद करते हैं.
बथुआ में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जिससे पाचन क्रिया बेहतर होती है और शरीर में जमा हुए अपशिष्ट पदार्थ को बाहर निकलने में मदद मिलती है. बथुआ के नियमित सेवन से यूरिक एसिड का स्तर शरीर में धीरे-धीरे कम होने लगता है. यह किडनी में मौजूद टॉक्सिंस को भी बाहर निकलने में बेहद फायदेमंद होता है, जिससे किडनी की हेल्थ भी बेहतर होती है.
बथुआ में पोटैशियम और आयरन की मात्रा भी भरपूर होती है, जिससे किडनी फंक्शनिंग बेहतर होती है, पोटेशियम की मात्रा होने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखना है और यूरिक एसिड को जमा होने से रोकता है. इसमें एंटी इन्फ्लेमेटरी अच्छा भी पाए जाते हैं, जो जोड़ों के सृजन में राहत देने में फायदेमंद होते हैं.
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