Kiss in Holi : होली ऐसा त्यौहार है जिसमें सारे सिग्नल टूट जाते हैं. भावनाओं के सारे ज्वार उफन आते हैं. उस घनघोर ज्वार में जब सामने महबूब हो तो फिर क्या आपसे रूका जाएगा? होली त्यौहार ही ऐसा है जिसमें प्यार, मस्ती और रंगों के बीच कपल्स सारें हदें पार कर जाते हैं. पहले से ही एक-दूसरे को रंग लगाकर लोग रंगों में पुत जाते हैं. यहां तक कि लोगों के चेहरे पर पैंट तक पोत दिया जाता है. कभी-कभी चेहरा तक पहचान में नहीं आता. ऐसे में जब महबूब के साथ होली हो तो कोई खुद को कैसे रोक सकता है. हुड़दंग में जब रोमांटिक पल आता है तो ‘किस’ किए बगैर कहां रहा जाता. लेकिन जरा ठहरिए. अगर आप रंगों से सराबोर होकर अपने पार्टनर के होंठों पर Kiss कर रहे हैं, तो आपको सावधानी बरतने की जरूरत होती है.
किस करने से क्या होगा
सर गंगाराम अस्पताल नई दिल्ली में डर्मेटोलॉजिस्ट डिपार्टमेंट के वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ ऋषि पाराशर कहते हैं बाजार में मिलने वाले ज्यादातर चमकीले और पक्के रंगों में लेड, मरकरी, क्रोमियम और कैडमियम जैसे खतरनाक केमिकल्स होते हैं. ये केमिकल इतने बारीक होते हैं कि स्किन को छेद कर खून में घुस जाते हैं और खून से पूरे शरीर में पहुंच जाते हैं. ऐसे में अगर ये कलर गलती से भी मुंह में चला जाए तो इसका कितना नुकसान हो सकता है, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. अगर ये कलर शरीर के अंदर चले जाएं, तो यह न केवल आपके पाचन तंत्र को बिगाड़ सकता है बल्कि अस्पताल पहुंचने तक कि नौबत आ सकती है.
क्या-क्या बीमारियों हो सकती है
डॉ. ऋषि पाराशर ने कहा कि यदि ये रंग आपके स्किन में भी जाता है तो इससे भी नुकसान होता है लेकिन अगर आपके मुंह में चला जाए तो नुकसान कहीं ज्यादा होता है. पहले ये जान लीजिए कि किस कलर में कौन सा केमिकल इस्तेमाल किया जाता है. ब्लैक कलर में लेड ऑक्साइड होता है. लेड ऑक्साइड इतना खतरनाक है कि इससे किडनी फेल्योर हो सकता है. हरे रंग के कलर में कॉपर सल्फेट होता है. कॉपर सल्फेट आंखों में एलर्जी दे सकता है. ज्यादा एक्सपोजर से आंखों की रोशनी भी जा सकती है. सिल्वर कलर में एल्युमिनियम ब्रोमाइड होता है. यह तो सबसे ज्यादा खतरनाक है जो कैंसर भी दे सकता है. ब्लू कलर में प्रशियन ब्लू होता है जिसके कारण कॉन्टेक्ट डर्मेटाइटिस हो सकता है. यह स्किन की बीमारी है. लाल कलर में मर्करी सल्फाइड होता है. मर्करी सल्फाइड खतरनाक टॉक्सिन है जिससे स्किन कैंसर हो सकता है. वाटर कलर में जेंशन वायलेट होता है. यह हाईली टॉक्सिन होता है.
सूखे गुलाल से भी खतरा
आजकल गीले रंग की जगह सूखे गुलाल का इस्तेमाल ज्यादा होता है. लेकिन सूखे गुलाल में भी हैवी मेटल मिलाया जाता है. हैवी मेटल में सिलिका, लेड, मर्करी, रिंक, एस्बेस्टॉस, निकल, कॉपर आदि मिले होते है. ये सब निमोनिया, एग्जिमा, आंख, लिवर और किडनी आदि में परेशानियां पैदा कर सकती हैं.
लड़कियों को ज्यादा नुकसान
डॉ. ऋषि पराशर कहते हैं कि इन केमिकल वाले रंगों से लड़कियों, बच्चे और बुजुर्गों को ज्यादा खतरा है. इनमें लड़कियों को सबसे ज्यादा खतरा है. किशोर उम्र की लड़कियों में यदि इन खतरनाक केमिकल वाले रंगों का एक्सपोजर ज्यादा हो गया तो उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान होगा. इससे उनकी स्किन ज्यादा डैमेज हो सकती हैं कि क्योंकि इस उम्र में हार्मोनल प्रभाव के कारण स्किन ज्यादा सेंसेटिव होती है. ऐसे में स्किन पर स्कार्स या दाग-धब्बे हो सकते है. कुछ मामलों में यह उम्र भर रह सकता है, इसलिए टीनएजर्स लड़कियों को जहां तक संभव हो इससे बचना चाहिए. जवान लड़कियों को भी पिग्मेंटेशन की समस्या बढ़ सकती है जिससे उनका सौंदर्य खराब हो सकता है. वहीं हैवी मैटल से प्रेग्नेंट लेडी में इसका सबसे अधिक घातक असर होता है. पेट में पल रहे बच्चे को भी इससे नुकसान होता है.
फिर क्या करें
सबसे बेहतर तो यही है कि केमिकल वाले रंगों से होली खेले ही नहीं. क्योंकि इसके साइड इफेक्ट्स बहुत ज्यादा है. कुदरती तरीके से तैयार रंगों का इस्तेमाल करें. अगर केमिकल वाले रंगों के साथ खेलना कर पड़ रहा है तो रंग लगने के तुरंत बाद पानी से इसे साफ करें. हमेशा बाल्टी में पानी रखें. रंग छुड़ाने के लिए सॉफ्ट साबुन का इस्तेमाल करें, डिटर्जेंट वाला साबुन न लगाएं. इसके बाद क्रीम लगा लें. बाहर जाते समय स्किन पर पहले से सन स्क्रीन या मॉइश्चराइजर लगा लें. काले चश्मा पहनें.
Kiss करना हो तो क्या करें
जब होंठों पर रंग चढ़ा हो तो कोशिश करें कि Kiss न करें. अगर किस करना ही पड़ रहा है तो पहले होंठों को साबुन से दोनों लोग धो लें. इसके बाद किस करें. किस करने के बाद पानी से मुंह को साफ करें लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि पानी अंदर न जाएं. होली में हुड़दंग करें लेकिन सेहत को ध्यान में रखते हुए करें. सेहत के साथ खिलवाड़ न करें. टेसू के फूल से होली खेलें. प्रेम और दोगुना हो सकता है.
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