Delhi Pollution Breathing Problem: यदि आप दिल्ली और आसपास रह रहे हैं या आपका कोई सगा-संबंधी यहां रह रहा है तो आपको बखूबी मालूम होगा कि यहां के आसमान में उठता काले धुएं का गुबार किस तरह जान पर आफत बनने लगा है. मुश्किल यह है कि हम सबको यही धुआं अपने लंग्स में लेना होगा और इसी से हमें ऑक्सीजन भी लेनी होगी. लेकिन बदकिस्मती यह होगी इस ऑक्सीजन में जहरनुमा PM 2.5 भी लेना होगा जो कि हमारी मजबूरी है. यह PM 2.5 इतना खतरनाक होता है कि हमारे शरीर को कोई हिस्सा नहीं है जहां इसका असर नहीं होता है. इसके लिए न्यूज 18 ने लंग्स स्पेशलिस्ट, हार्ट स्पेशलिस्ट, स्किन स्पेशलिस्ट, किडनी स्पेशलिस्ट और आहार विज्ञान स्पेशलिस्ट से बात की है. इन सभी एक्सपर्ट की चेतावनी यहां बता रहे हैं.
PM 2.5 होता क्या है
पहले यह जान लीजिए कि PM 2.5 होता क्या है. PM का मतलब होता है पार्टिकुलैट मैटर. यानी सस्पेंडेड पार्टिकल या पदार्थ का अत्यंत बारीक कण. और 2.5 का मतलब होता है. 2.5 माइक्रोन.1 माइक्रोन होता है 0.0001 मिलीमीटर है. इसे इस तरह समझिए 1 मीटर में 1000 मिलीमीटर होते हैं और एक मिलीमीटर का 10हजारवां भाग होगा एक माइक्रोन. यानी एक मीटर को 10 लाख टुकड़े कर देंगे उसमें से जो एक टुकड़ा होगा, उसे कहते हैं माइक्रोन. जाहिर है इसे आंखों से नहीं देखा जा सकता. इसके लिए माइक्रोस्कोप चाहिए. प्रदूषण में 2.5 पीएम इसलिए लिखा जाता है क्योंकि वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदूषण से निकलने वाले धुआं में 2.5 पीएम से भी छोटे कण होते हैं जिसे सांस लेने के दौरान नाक के बाल और नाक का म्यूकस रोक नहीं पाता है. ये साइलेंट किलर बनकर हमारे शरीर को छलनी करते हैं. इन पीएम 2.5 में कार्बोन मोनोऑक्साइड,नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड,ओजन, मीथेन, बेंजीन, लेड, कैडमियम जैसे अत्यंत जहरीले कण होते हैं. ये कैंसर का कारण भी बन सकते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक PM 2.5 के कारण 2022 में 78 लाख लोगों की मौत हुई.

फेफड़े को कैसे छलनी करते हैं ये
फोर्टिस अस्पताल मानेसर, गुरुग्राम में पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉ. कर्ण मेहरा ने बताया कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 350 दर्ज किया गया जबकि AQI 50 से नीचे होना चाहिए. इस AQI को आप ऐसे समझ सकते हैं कि अगर AQI 100 है तो इसका मतलब है कि 1 घनमीटर हवा में 60 माइक्रोग्राम PM2.5 मौजूद है. इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि इस काले धुएं का असर हमारे उपर कितना हो रहा है. अब यह जानिए कि यह पार्टिकुलैट मैटर हमारे शरीर में करता क्या है. डॉ. कर्ण मेहरा ने बताया कि ये छोटे कण हमारे फेफड़ों के अंदर जाते हैं और खून में घुस जाते हैं. फिर खून से ये सारे शरीर के सिस्टम में उधम मचाते रहते हैं. जब ये कण लंग्स में जाएंगे तो धीरे-धीरे लंग्स में ऑक्सीजन भरने की जो जगह होती है उसमें इंफ्लामेशन करने लगेंगे. जैसे कहीं स्किन कट जाता है ठीक उसी तरह ये कण लंग्स के एल्विलॉय को घायल करने लगेगा. इससे लंग्स में घाव होने लगेगा और ऑक्सीजन को ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाएगी. यानी लंग्स में प्रति मिनट ऑक्सीजन लेने की जो दर VO₂ है वो कम हो जाएगी. इससे जो एकदम हेल्दी व्यक्ति है, उसे भी सांस लेने में तकलीफ होगी. दम फूलने लगेगा. जिन लोगों को पहले से लंग्स से संबंधित बीमारियां हैं, उन पर इसका क्या असर होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं. इसलिए जोखिम वाले व्यक्ति को हर हाल में इस प्रदूषण से बचना चाहिए.
हार्ट कैसे घायल होता है
फोर्टिस अस्पताल, नई दिल्ली में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी ने बताया कि दिल्ली की ये जहरीली हवा हार्ट अटैक के जोखिम को बहुत तेजी से बढ़ा सकता है. पॉल्यूशन से निकले जब हमारे खून में घुसते हैं तो खून की नलिकाओं या धमनियों में इंफ्लामेशन पैदा कर देते हैं. इंफ्लामेशन उसी तरह से होता है जब आपकी स्किन कहीं कट जाती है और वहां पर उभार आ जाता है. ब्लड वैसल्स के अंदर यह उभार आने के कारण पहले से जहां कोलेस्ट्रॉल दबा हुआ था वहां वह भी उभर जाएगा और अचानक ब्लड क्लॉट हो जाएगा यानी खून अपने आप में गुच्छा बनाने लगेगा. जैसे ही गुच्छा बनेगा खून जाने का रास्ता जाम हो जाएगा. फिर खून हार्ट तक कम पहुंचेगा या पहुंचेगा ही नहीं. इस स्थिति में हार्ट खून को पंप करना बंद कर देगा. इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक या हार्ट फेल्योर का खतरा बढ़ जाएगा. जिन लोगों को पहले से खतरा है, उनके लिए यह बेहद मुश्किल हो जाएगा. चिंता की बात यह है कि भारत में करीब 20 प्रतिशत वयस्कों में पहले से हार्ट में कोलेस्ट्रॉल या अन्य तरह की दिक्कतें धमनियों में होती है जिसका पता उन्हें नहीं होता. इसलिए इनमें से किसी में भी हार्ट जोखिम बहुत बढ़ा रहता है. ऐसे में पहले से जांच करानी जरूरी है.
हेल्दी हार्ट पर क्या होगा असर
पॉल्यूशन ज्यादा होने से हमारा पूरा सिस्टम हिलता है. डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी ने बताया कि पॉल्यूशन के कारण लंग्स हो या हार्ट सब पर स्ट्रैस बढ़ता है. इससे पहले से रिजर्व क्षमता का इस्तेमाल होने लगता है. लंग्स और हार्ट को अतिरिक्त काम करना पड़ता है. इससे पूरा शरीर कमजोर होता है. ऐसे में जिन लोगों का बीपी कंट्रोल है, उनका बीपी अनकंट्रोल्ड हो जाएगा और जिन लोगों का बीपी बॉर्डर लाइन पर है, उनका भी बढ़ जाएगा. इस पॉल्यूशन के कारण हार्ट रेट भी बढ़ जाएगा जिससे हार्ट को अतिरिक्त पंप करना होगा. यानी इस पॉल्यूशन का असर हेल्दी लोगों पर भी नकारात्मक रूप से होगा.
किडनी पर क्या होगा असर
जैसा कि पहले बताया जा चुका है इससे शरीर का पूरा सिस्टम हिल जाएगा. सर गंगाराम अस्पताल में यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के वाइस चेयरमैन डॉ. अमरेंद्र पाठक ने बताया कि जब ये प्रदूषण के कण खून में जाएगा तो किडनी को इसे छानने में दिक्कत होगी. यानी हमारे शरीर में जितना भी खून है वह किडनी में ही आती है. किडनी खून से अच्छी चीजों को शरीर में रख लेती है और गंदी चीजों को शरीर से बाहर निकाल देती है लेकिन जब PM 2.5 की मात्रा बहुत ज्यादा हो जाएगी तो यह खून को रिफाइंड करने वाले ग्लोब्यूल्स में फंसने लगेंगे जिससे इसे निकालने में बहुत ज्यादा मेहनत की जरूरत होगी. हो सकता है इस कण से इस छन्नी में इंफ्लामेशन भी हो जाए तो और ज्यादा दिक्कत होगी. किडनी पर यह अनावश्यक लोड किडनी की क्षमता को कमजोर करने लगेगी. जो लोग पहले से किडनी की समस्या से ग्रस्त हैं, उनके लिए और ज्यादा मुसीबत होगी.
स्किन पहला टारगेट
सर गंगाराम अस्पताल के डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. ऋषि परासर ने बताया कि पॉल्यूशन के लिए स्किन पहला टारगेट है. प्रदूषण के कण जब स्किन पर चिपकते हैं तो धीरे-धीरे यह स्किन की कोशिकाओं में घुसने लगते हैं. इसका पहला असर चेहरे पर देखने को मिलता है क्योंकि चेहरा ढका हुआ नहीं रहता. इसलिए आप देखेंगे कि चेहरे की चमक कम होने लगती है. स्किन बहुत ज्यादा ड्राई होने लगती है. चेहरे छिलने लगता है. कील-मुहांसे बढ़ने लगते हैं. मतलब स्किन से संबंधित वो सभी समस्या होगी जो आपने पहले नहीं देखी होगी. अगर प्रदूषण में सालों साल रहे तो स्किन कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है. इसलिए बाहर निकलते समय चेहरे को ढके और स्किन में प्रोटेक्टिव लेयर के लिए माइश्चर या तेल लगाएं.
फिर क्या करें इससे बचने के लिए
प्रदूषण की मार से बचने के लिए जितना संभव हो प्रदूषण में कम निकलें. जब निकलें तो पूरी तरह से कवर कर निकलें. पूरे शरीर में नारियल का तेल लगाएं. डॉ. कर्ण मेहरा ने कहा कि दिल्ली की इस जहरीली हवा से बचने का सबसे बेस्ट तरीका यही है कि सुबह और शाम बाहर नहीं निकलें क्योंकि सुबह और शाम कोहरे में जहरीली गैसें ज्यादा सस्पेंडेंड रहती हैं. इसके बाद अगर आप निकलते हैं तो धुंध में गैसे कम रहती है. डॉ. कर्ण मेहरा कहते हैं कि N95 मास्क दिल्ली की जहरीली हवा से बचाव के लिए सबसे प्रभावी माने जाते हैं, क्योंकि इन्हें हवा में मौजूद लगभग 95 प्रतिशत कणों को छानने के लिए डिजाइन किया गया है. इसी तरह N99 मास्क करीब 99 प्रतिशत हवाई कणों से सुरक्षा प्रदान करते हैं. पर्याप्त पानी पिएं और घर में एक्सरसाइज करें. सीनियर डायटीशियन डॉ. प्रियंका रोहतगी बताती हैं कि पॉल्यूशन से बचने के लिए एंटीऑक्सीडेंट्स वाली डाइट सबसे फायदेमंद है. जब ये प्रदूषण के कण शरीर में इंफ्लामेशन बढ़ाते हैं तो इसे एंटीऑक्सीडेंट्स ही बैलेंस करते हैं. इसके लिए हरी पत्तीदार सब्जियां, स्प्रॉट यानी बादाम, मूंग आदि को भींगाकर खाएं. खूब फल खाएं, खूब साग खाएं, सीड्स खाएं, ड्राई फ्रूट्स खाएं. इसके साथ ही रोजाना घर में ही एक्सरसाइज करें और खूब पानी पिएं.
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