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Ayurvedic Juice Stall In Chhapra: छपरा के राजेंद्र स्टेडियम गेट पर प्रियेश कुमार का आयुर्वेदिक जूस स्टॉल काफी फेमस है. सुबह 5 से 8 बजे तक यहां लोगों की भीड़ लगी रहती है. जहां जड़ी-बूटियों से बना जूस बीपी, शुगर, कोलेस्ट्रॉल में फायदेमंद है. मात्र 30 रुपये में लोगों की सेहत को सुधारा जा रहा है.
छपरा: आज के दौर में जहां लोग बाजार के पैक जूस और एनर्जी ड्रिंक पर निर्भर होते जा रहे हैं. वहीं बिहार के छपरा शहर में एक ऐसा आयुर्वेदिक जूस स्टॉल है जिसने लोगों की सोच को बदलकर रख दिया है. यह जूस स्टॉल शहर के राजेंद्र स्टेडियम मुख्य गेट के पास लगाया जाता है. जहां सुबह-सुबह सेहत के दीवाने लोगों की लंबी कतार नजर आती है. यहां पर इन खास से चीज से जूस तैयार किया जाता है.
सुबह 5 बजे से 8 बजे तक लगती है भीड़
यह स्टॉल रोजाना सुबह 5 बजे से 8 बजे तक लगता है. यहां की खास बात यह है कि इस जूस को पीने के लिए जिलेभर से लोग यहां पहुंचते हैं. जूस का स्वाद भले देसी है, लेकिन इसके फायदे आधुनिक दवाओं से कम नहीं. यह जूस पूरी तरह से जड़ी-बूटियों के मिश्रण से तैयार किया जाता है. जो शरीर की कई गंभीर बीमारियों को दूर करने में सहायक है.
इन चीजों से तैयार होता है जूस
इस स्टॉल को प्रियेश कुमार संचालित करते हैं. वे बताते हैं कि उन्होंने राजस्थान में आयुर्वेदिक प्रशिक्षण लिया. इसके बाद सीवान जिले में इसका अभ्यास किया. इसके बाद छपरा में स्टार्टअप के रूप में इसे शुरू किया. प्रियेश कहते हैं कि यह कोई सामान्य जूस नहीं है. इसे लहसुन, अदरक, एलोवेरा, गिलोय, नीम पत्ता, जामुन पत्ता, कच्चा हल्दी, तुलसी, कड़ी पत्ता, धनिया पत्ता और करेला जैसी कई औषधीय पौधों के मिश्रण से तैयार किया जाता है. इसके अलावा इसमें अर्जुन छाल, अश्वगंधा, मुलेठी, आंवला, हरा बहेड़ा और मेथी के पानी का भी उपयोग होता है.
इन बीमारियों में है फायदेमंद
इन सबको मिलाकर यह एक मिक्स आयुर्वेदिक जूस बनता है. जो ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखता है. प्रियेश बताते हैं कि यह शरीर को अंदर से डिटॉक्स करता है. इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है. स्थानीय निवासी राजीव तिवारी जो हर सुबह यहां जूस पीने आते हैं. बताते हैं कि मैं पिछले एक हफ्ते से यह जूस पी रहा हूं. इससे शरीर हल्का महसूस होता है. बीपी-शुगर दोनों कंट्रोल में हैं. हमारे पूर्वज भी इन्हीं जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब हम आधुनिक दवाओं में इतने उलझ गए हैं कि इन देसी नुस्खों को भूल गए हैं.
30 रुपये में मिलता है सेहत का खजाना
प्रियेश के मुताबिक जूस की तैयारी रात के 1 बजे से शुरू होती है. ग्रामीण इलाकों और बाग-बगीचों से जड़ी-बूटियां मंगाई जाती हैं. कुछ वहीं से तोड़ ली जाती हैं. जबकि कुछ दुर्लभ जड़ी-बूटियां महंगे दामों पर बाजार से खरीदनी पड़ती हैं. उन्हें मिलाकर एक खास अनुपात में जूस तैयार किया जाता है, ताकि इसका प्रभाव शरीर पर समुचित रूप से पड़े. महज ₹30 में मिलने वाला एक गिलास यह जूस हर उम्र के लोगों के बीच लोकप्रिय हो चुका है. सुबह स्टॉल पर युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक की भीड़ लगी रहती है. यहां आने वालों का मानना है कि यह जूस न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि पूरी तरह से सुरक्षित और प्राकृतिक भी है.
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