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भारत में चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है. सुबह की शुरुआत से लेकर मेहमानों के स्वागत तक, चाय हर मौके पर मौजूद रहती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा शहर भी है जिसे “चाय की राजधानी” कहा जाता है. यहां चाय सिर्फ पी जाती ही नहीं, बल्कि अलग-अलग तरीकों से बनाई जाती है और इसके पीछे एक लंबा, दिलचस्प इतिहास भी जुड़ा हुआ है.
भारत में चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि आदत, एहसास और संस्कृति का हिस्सा है. जब भी चाय की राजधानी की बात होती है, तो असम का डिब्रूगढ़ शहर सबसे पहले याद आता है. ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसा यह शहर देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े चाय उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाता है. डिब्रूगढ़ को अक्सर “टी सिटी ऑफ इंडिया” भी कहा जाता है, क्योंकि यहां चारों तरफ फैले चाय बागान, फैक्ट्रियां और चाय से जुड़ी जीवनशैली इसे खास बनाती हैं. सुबह की शुरुआत से लेकर शाम की बैठकों तक, यहां हर पल चाय से जुड़ा होता है.
डिब्रूगढ़ का चाय से जुड़ा इतिहास करीब दो सौ साल पुराना है. 19वीं सदी में जब अंग्रेज भारत आए, तब उन्होंने असम की जलवायु और मिट्टी को चाय के लिए बेहद अनुकूल पाया. कहा जाता है कि 1823 में असम में पहली बार चाय के पौधों की पहचान हुई, जिसके बाद अंग्रेजों ने यहां बड़े पैमाने पर चाय की खेती शुरू की. धीरे-धीरे डिब्रूगढ़ चाय उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन गया. यहां से चाय न सिर्फ भारत के अलग-अलग हिस्सों में जाती है, बल्कि विदेशों तक भी निर्यात की जाती है. इसी वजह से यह शहर चाय उद्योग की रीढ़ माना जाता है.
डिब्रूगढ़ की खासियत सिर्फ चाय उगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां चाय पीने के तरीके भी बेहद अनोखे हैं. यहां की सबसे मशहूर चाय है असम ब्लैक टी, जो अपने गहरे रंग, तेज स्वाद और मजबूत खुशबू के लिए जानी जाती है. इसके अलावा दूध वाली चाय, मसाला चाय, अदरक-इलायची वाली चाय और हल्की मीठी चाय यहां आम है. स्थानीय लोग कई बार चाय में गुड़ का इस्तेमाल भी करते हैं, जिससे इसका स्वाद और भी देसी हो जाता है. चाय यहां सिर्फ प्यास बुझाने का जरिया नहीं, बल्कि बातचीत और मेलजोल का माध्यम है.
डिब्रूगढ़ की चाय संस्कृति में चाय बागानों का बड़ा योगदान है. सुबह-सुबह जब चाय की पत्तियां तोड़ी जाती हैं, तब पूरे इलाके में एक अलग ही खुशबू फैल जाती है. यहां काम करने वाले लोग चाय के साथ ही अपना दिन शुरू करते हैं. कई चाय बागानों में आज भी पारंपरिक तरीके से चाय बनाई जाती है, जिससे उसका स्वाद और भी शुद्ध रहता है. यही वजह है कि डिब्रूगढ़ की चाय दुनिया भर में अपनी अलग पहचान रखती है.
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विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें
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