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आज है पिशाचमोचन श्राद्ध, भूत-प्रेत से पीड़ित व्यक्ति इस दिन जरूर करें श्राद्ध और तर्पण, इस मंत्र का करें जाप

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गया- पिशाचमोचिनी तिथि (श्राद्ध) या पिशाचमोचन श्राद्ध तिथि मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्दशी इस साल 14 दिसंबर यानी शनिवार को है. गया मंत्रालय वैदिक पाठशाला के पंडित राजा आचार्य बताते हैं कि इस दिन प्रेत योनि को प्राप्त जीवों (पूर्वजों) के निमित्त तर्पण आदि करने से उनकी सदगति होती है. जिनके घर-परिवार, आस-पड़ोस या परिचय में किसी की अकाल मृत्यु हुई हो या कोई भूत-प्रेत और पितृ बाधा से पीड़ित हो, वे पिशाच मोचिनी तिथि को उनकी सदगति, आत्मशांति और मुक्ति के लिए संकल्प करके श्राद्ध तर्पण अवश्य करें. भूत-प्रेत आदि से ग्रस्त व्यक्ति इसे अवश्य करें.

इस दिन प्रातः स्नान के बाद दक्षिण मुख होकर बैठें. तिलक, आचमन आदि के बाद पीतल या तांबे के थाल और तपेली आदि में पानी लें. उसमें दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, कुम -कुम, अक्षत, तिल, कुश मिलाकर रखें. हाथ में शुद्ध जल लेकर संकल्प करें कि अमुक व्यक्ति (नाम) के प्रेतत्व निवारण हेतु हम आज पिशाचमोचन श्राद्ध तिथि को यह पिशाचमोचन श्राद्ध कर रहे हैं. हाथ का जल जमीन पर छोड़ दें. फिर थोड़े काले तिल अपने चारों ओर जमीन पर छिड़क दें कि भगवान विष्णु हमारे श्राद्ध की असुरों से रक्षा करें.

इस तरह करें पाठ
अब अनामिका उंगली में कुश की अंगूठी पहनकर (ૐ अर्यमायै नमः) मंत्र बोलते हुए पितृतीर्थ से 108 तर्पण करें और थाल में से दोनों हाथों की अंजली भर-भर के पानी लें और दायें हाथ की तर्जनी उंगली व अंगूठे के बीच से गिरे, इस प्रकार उसी पात्र में डालते रहें.( तर्पण पीतल या तांबे के थाल और तपेली में बनाकर रखे जल से करना है). 108 तर्पण हो जाने के बाद दायें हाथ में शुद्ध जल लेकर संकल्प करें कि सर्व प्रेतात्माओं की सदगति के निमित्त किया गया, यह तर्पण कार्य भगवान नारायण के श्रीचरणों में समर्पित है. फिर तनिक शांत होकर भगवद्-शांति में बैठें. बाद में तर्पण के जल को पीपल में चढ़ा दें.

14 दिसंबर 2024 शनिवार को मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्दशी है. मत्स्यपुराण के अनुसार मार्गशीर्ष मास शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि के दिन अगर कोई शिवजी का 17 नामों से पूजन करे या वो 17 मंत्र बोलकर उनको प्रणाम करें. जो शिव है वो गुरु है और जो गुरु है वो शिव है. अपने गुरुदेव का भी स्मरण करें तो भी उन तक पहुंच जाता है और ज्यादा किसी को समस्या है वो विशेष रूप से 17 नाम मस्त्यपुराण में बताया है.

इन मंत्र का करें जाप
ॐ शिवाय नम:
ॐ सर्वात्मने नम:
ॐ त्रिनेत्राय नम:
ॐ हराय नम:*
ॐ इन्द्र्मुखाय नम:*
ॐ श्रीकंठाय नम:*
ॐ सत्योजाताय नम:*
ॐ वामदेवाय नम:*
ॐ अघोरहृदयाय नम:*
ॐ तत्पुरुषाय नम:*
ॐ ईशानाय नम:*
ॐ अनंतधर्माय नम:*
ॐ ज्ञानभुताय नम:*
ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नम:*
ॐ प्रधानाय नम:*
ॐ व्योमात्मने नम:*
ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम:*

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