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कोडरमा में सिंदूर खेल रस्म से हुई मां दुर्गा की विदाई, महिलाओं ने लिया सुहाग के लिए आशीर्वाद

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कोडरमा: विजयादशमी का त्योहार, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, कोडरमा जिले में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. इस मौके पर अड्डी बंगला दुर्गा मंडप प्रांगण में पारंपरिक बंगाली रस्म सिंदूर खेल के साथ माता दुर्गा को विदाई दी गई. सुहागिन महिलाओं के लिए यह रस्म विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इसे निभाने से उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इस धार्मिक अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया और अपनी मांग में सिंदूर भरकर अपने पति की दीर्घायु और अमर सुहाग की कामना की.

सिंदूर खेल की परंपरा और उसका महत्व
सिंदूर खेल बंगाली समाज की एक पुरानी परंपरा है, जिसे विशेष रूप से विजयादशमी के दिन निभाया जाता है. पहले इस रस्म को सिर्फ बंगाली समाज की सुहागिन महिलाएं निभाती थीं, लेकिन अब इसकी धार्मिक महत्ता को समझते हुए अन्य समाज की महिलाएं भी इसमें शामिल होती हैं. रानी राजीव, जिन्होंने Bharat.one से विशेष बातचीत की, ने बताया कि पहले यह रस्म बंगाली समाज तक सीमित थी, लेकिन अब सभी समाज की महिलाओं के लिए यह आस्था और परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है.

इस रस्म में, महिलाएं मां दुर्गा के चरणों में सिंदूर अर्पित करती हैं और फिर उसी सिंदूर को अपनी मांग में भरकर अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. माना जाता है कि यह रस्म सुहागिन महिलाओं को माता दुर्गा से अमर सुहाग का आशीर्वाद दिलाती है, जो उनके वैवाहिक जीवन को सुखी और समृद्ध बनाने में सहायक होता है.

कैसे निभाई जाती है सिंदूर खेल की रस्म?
वर्षा सोनकर ने Bharat.one से बात करते हुए इस रस्म की विशेष प्रक्रिया के बारे में बताया. सिंदूर खेल की रस्म में सबसे पहले महिलाएं माता दुर्गा की प्रतिमा के चरणों में सिंदूर अर्पित करती हैं. इसके बाद, वे एक-दूसरे की मांग में इस सिंदूर को लगाकर अपने पति की लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन की कामना करती हैं. इस अवसर पर महिलाओं ने माता दुर्गा की आरती उतारी और उन्हें विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की. इसके साथ ही, पूरे परिवार पर माता की कृपा बनी रहे और सुख-समृद्धि का वास हो, इसकी भी प्रार्थना की गई.

अमर सुहाग का आशीर्वाद और अगले नवरात्र का इंतजार
इस धार्मिक अनुष्ठान के बाद, महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर माता दुर्गा से आशीर्वाद प्राप्त किया और अपने जीवन में अमर सुहाग की कामना की. यह रस्म केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुहागिन महिलाओं के बीच आपसी प्रेम और सद्भाव को भी बढ़ाती है.

इसके बाद, माता दुर्गा की प्रतिमा को पूरे सम्मान और धार्मिक विधि-विधान के साथ विदाई दी गई. इस मौके पर महिलाएं माता से अगले वर्ष नवरात्र में पुनः आगमन की प्रार्थना करती हैं और पूरे परिवार के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना करती हैं. इस तरह, माता दुर्गा की विदाई के साथ कोडरमा में विजयादशमी का उत्सव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ.

समाज में बढ़ती परंपरा की लोकप्रियता
बंगाली समाज द्वारा शुरू की गई यह परंपरा अब पूरे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन बन चुकी है. इस विशेष रस्म में अन्य समाज की महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ रही है, जो इस रस्म की धार्मिक महत्ता और समाज में इसके महत्व को दर्शाती है.

निष्कर्ष
सिंदूर खेल रस्म कोडरमा की विजयादशमी का एक महत्वपूर्ण और अनूठा हिस्सा बन चुका है, जिसमें सुहागिन महिलाएं मां दुर्गा से अखंड सौभाग्य और अमर सुहाग का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं. यह रस्म केवल बंगाली समाज तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब अन्य समाजों की महिलाएं भी इसे अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा मानती हैं. विजयादशमी के इस पर्व पर मां दुर्गा की विदाई के साथ-साथ, यह रस्म महिलाओं के जीवन में सुख-समृद्धि और वैवाहिक सुख का प्रतीक बन गई है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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