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Ujjain News: उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज ने Bharat.one से कहा कि खरमास में बड़े शुभ कार्यों पर रोक होती है लेकिन रोजमर्रा से जुड़ी जरूरतों और जरूरी वस्तुओं की खरीदारी को पूरी तरह वर्जित नहीं माना गया है.
उज्जैन. हिंदू धर्म में किसी भी कार्य को करने से पहले शुभ मुहूर्त देखने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है. ऐसा माना जाता है कि सही और शुभ समय में किया गया कार्य जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक परिणाम लेकर आता है. इसी कारण लोग विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण और अन्य महत्वपूर्ण संस्कारों के लिए विशेष मुहूर्त का चयन करते हैं. हालांकि वर्ष में कुछ ऐसे काल भी आते हैं, जिन्हें ज्योतिष शास्त्र में अनुकूल नहीं माना जाता. इन्हीं में से एक समय को खरमास कहा जाता है, जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करता है, तब यह अवधि प्रारंभ होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्यों से परहेज करने की सलाह दी जाती है, इसलिए विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नामकरण जैसे संस्कार इस समय नहीं किए जाते हैं. ऐसे में लोगों के मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या खरमास के दौरान नए कपड़े खरीदना भी अशुभ माना जाता है. खासकर त्योहारों या किसी विशेष अवसर के चलते लोग इस विषय को लेकर भ्रम में रहते हैं.
खरमास में नए कपड़े खरीदना शुभ या अशुभ?
शास्त्रों के अनुसार, खरमास में कपड़े खरीदना अशुभ नहीं बताया गया है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, खरमास के दौरान वस्त्रों की खरीदारी पर कोई प्रतिबंध नहीं होता. नए कपड़े लेना किसी भी प्रकार का मांगलिक संस्कार नहीं है बल्कि यह दैनिक जीवन से जुड़ी सामान्य आवश्यकता मानी जाती है. कपड़ों की खरीद का सीधा संबंध ग्रहों या नक्षत्रों के अशुभ प्रभाव से नहीं जोड़ा जाता. इसी कारण खरमास की अवधि में भी लोग निश्चिंत होकर नए वस्त्र खरीद सकते हैं. आचार्य का कहना है कि नए कपड़े पहनने से मन में उत्साह और सकारात्मकता बनी रहती है. यदि वस्त्र पूजा-पाठ, धार्मिक यात्रा या किसी पवित्र उद्देश्य के लिए लिए जा रहे हों, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है.
खरमास में किन वस्तुओं की खरीद से बचना चाहिए?
भले ही इस अवधि में दैनिक उपयोग की चीजें और कपड़े लेना वर्जित नहीं माना जाता लेकिन कुछ बड़ी खरीदारी से दूरी बनाना बेहतर होता है. खरमास के दौरान सोने-चांदी के आभूषण जैसी कीमती धातुओं की खरीद को शुभ नहीं माना जाता है. इसके अलावा वाहन, मकान, जमीन या फ्लैट जैसी संपत्ति से जुड़े सौदे भी इस समय टालने की सलाह दी जाती है.
शेयर, बिजनेस डील या अन्य बड़े आर्थिक निवेश करने के लिए भी यह काल अनुकूल नहीं माना जाता. शास्त्रों के अनुसार, ऐसे महत्वपूर्ण और दीर्घकालिक निर्णयों के लिए सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के बाद का समय अधिक फलदायी होता है, इसलिए समझदारी यही है कि बड़े और खर्चीले फैसले मकर संक्रांति के बाद ही लिए जाएं ताकि सकारात्मक परिणाम प्राप्त हों.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.
