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मार्गशीर्ष की अंतिम पूर्णिमा बेहद शुभ मानी जाती है. लक्ष्मी-नारायण पूजा, विष्णु चालीसा पाठ और पीपल के नीचे तिल का दीपक जलाने से शांति, सुख और समृद्धि प्राप्त होती है. महंत स्वामी कामेश्वरानंद के अनुसार यह दिन भगवान कृष्ण को प्रिय है और किए गए दान-पुण्य का कई गुना फल मिलता है.
मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा को बहुत शुभ माना जाता है. यह साल की अंतिम पूर्णिमा होती है, इसलिए इसका महत्व और बढ़ जाता है. इस दिन किए गए पूजा-पाठ और दान से मन को शांति, घर में सुख और जीवन में तरक्की मिलती है.
महंत स्वामी कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि मार्गशीर्ष की पूर्णिमा भगवान कृष्ण को अत्यंत प्रिय है. धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इस दिन लक्ष्मी और नारायण की पूजा करने से घर में धन-धान्य आता है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है.
इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है. स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें. माना जाता है कि इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और पूरे दिन मन शांत व खुश रहता है.
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घर में एक साफ स्थान पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी की प्रतिमा रखें. भगवान को चंदन, फूल और माला अर्पित करें. देवी लक्ष्मी को श्रृंगार का सामान चढ़ाएं और दीपक जलाकर श्रद्धा से आरती करें.
पूजा के बाद विष्णु चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है. मन ही मन शांति और समृद्धि के लिए मंत्रों का जाप करें. फल, मिठाई और प्रसाद चढ़ाने से परिवार में प्रेम, सुख और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है.
पूर्णिमा के दिन आटे का दीपक बनाकर उसमें तिल का तेल भरें. सुबह पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं. दीप जलाते समय अपनी मनोकामना मन में कहें. इस उपाय को बहुत फलदायी माना जाता है.
लोक मान्यता है कि पीपल के नीचे तिल का दीपक जलाने से आर्थिक परेशानियां धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं. कहा जाता है कि यह उपाय रुके हुए कामों को भी आगे बढ़ाता है और जीवन में सफलता दिलाता है.
