छतरपुर जिले का क्यूटी गांव हनुमान जी का आस्था का केन्द्र माना जाता है. मान्यता है कि यहां का परिक्रमा हर कोई नहीं लगा पाता है. अगर किसी व्यक्ति के मन में परिक्रमा लगाते हुए घमंड होता है तो फिर वह व्यक्ति परिक्रमा पूरा नहीं लगा पाता है. बता दें, हनुमान जी का ये परिक्रमा ग्रेनाइट की बड़ी-बड़ी चट्टानों के बीच से होकर करना पड़ता है.
पंडित दिवाकर पयासी Bharat.one से बातचीत में बताते हैं कि यहां जो हनुमान जी की चमत्कारिक मूर्ति है, यह सालों पुरानी है. मैं पिछले 50 सालों से यहां दर्शन करने आ रहा हूं. इस मूर्ति के इतिहास के बारे में ज्यादा जानकारी तो नहीं है. ये जरूर बता सकते हैं कि ये मूर्ति हमारे पिताजी के पिताजी…,पुरखे देखते चले आ रहे हैं. यह मूर्ति बहुत चमत्कारिक है. हमने बहुत चमत्कार देखे हैं. जिन लोगों को संतान नहीं होती है उन्हें संतान प्राप्ति हुई है. पहाड़ के नीचे बसे गांव की हमेशा रक्षा करते हैं.
आग लगने से मूर्ति का आकार नहीं दिखता
दिवाकर पंडित बताते हैं कि इस विशाल चट्टान पर पहले मूर्ति स्पष्ट तौर पर दिखती थी. लेकिन एक बार यहां आग लग गई थी, जिस वजह से यहां की मूर्ति का आकार मिट गया, लेकिन लोगों की आस्था कम नहीं हुई है. यूपी के झांसी से भी श्रद्धालु यहां आते हैं.
पन्ना के अजयगढ़ से आए श्रद्धालु बताते हैं कि हनुमान जी की यह आदिशक्ति मूर्ति है. यह मूर्ति अचानक अपने से इस विशाल चट्टान में प्रकट हुई है. इस मूर्ति को किसी ने बनाया नहीं है. यहां कोई पुजारी नहीं रह सकता है. हमने प्रसाद चढ़ाया है तो अपने साथ पुजारी लेकर भी आए हैं.
घमंड आने पर नहीं होता पूरा परिक्रमा
श्रद्धालु बताते हैं कि हनुमान जी की यहां जो परिक्रमा होती है. वह सबसे कठिन मानी जाती है. क्योंकि चट्टानों के बीच से होकर परिक्रमा करना पड़ता है. अगर किसी व्यक्ति को परिक्रमा के दौरान घमंड आता है तो वह परिक्रमा पूरा नहीं कर पाता है.
FIRST PUBLISHED : December 6, 2024, 17:33 IST
