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Korba News: पंडित अमरनाथ त्रिवेदी ने Bharat.one से कहा कि मार्गशीर्ष माह में भगवान श्रीकृष्ण का पूजन बेहद फलदायी होता है. लोक परंपरा के अनुसार, इस महीने के हर गुरुवार को महालक्ष्मी का व्रत और पूजन किया जाता है.
कोरबा. सनातन धर्म में मार्गशीर्ष मास यानी अगहन मास का विशेष महत्व है. इसे स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवत गीता में श्रेष्ठतम मास बताया है. जहां पूरे देश में दीपावली पर माता लक्ष्मी का पूजन किया जाता है, वहीं छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति में अगहन मास में आने वाले हर गुरुवार को महालक्ष्मी की विशेष आराधना का विधान है. यह अनुष्ठान इतना महत्वपूर्ण माना जाता है कि इसे ‘अगहन की दीपावली’ भी कहा जाता है. इस दौरान महिलाएं अन्न-धन की अधिष्ठात्री देवी माता महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कठोर उपवास रखती हैं और विधि-विधान से पूजा करती हैं.
आटे से बनाई जाती है रंगोली
धार्मिक मान्यता है कि स्वच्छता में ही माता लक्ष्मी का वास होता है. इस परंपरा में यह देखा जाता है कि दीपावली के बाद भी घरों की साफ-सफाई और निर्मलता पर विशेष ध्यान दिया जाता है. गुरुवार की पूर्व संध्या पर ही महिलाएं अपने घरों और आस-पड़ोस को स्वच्छ कर सजावट शुरू कर देती हैं. इस पर्व की सबसे आकर्षक विशेषता चावल के आटे से बनाई जाने वाली रंगोली है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘चौक’ या ‘ऐपन’ भी कहते हैं. महिलाएं अत्यंत कलात्मक ढंग से घर के चौक-आंगन को सजाती हैं. इसके बाद मुख्य द्वार से लेकर पूजा स्थल तक चावल के घोल से माता महालक्ष्मी के प्रतीक स्वरूप पद चिन्ह (पैरों के निशान) उकेरे जाते हैं. यह इस बात का संकेत होता है कि माता लक्ष्मी को घर में प्रवेश के लिए आमंत्रित किया गया है. संध्या बेला में पारंपरिक दीप प्रज्वलित कर महालक्ष्मी का आह्वान किया जाता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
