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मार्गशीर्ष मास का पहला प्रदोष व्रत कब? उज्जैन के आचार्य ने बताया महत्व, जानें शुभ मुहूर्त, नियम

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उज्जैन. हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है. मान्यता है कि इस खास दिन पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव की कृपा से सुख-समृद्धि और जीवन में सफलता की प्राप्ति होती है. दरअसल, एक महीने में 2 प्रदोष व्रत होते हैं. इस दिन सुबह से शाम तक व्रत किया जाता है और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है. उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज ने नवंबर के अंतिम प्रदोष व्रत की महिमा बताई.

नवंबर में कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत
वैदिक पंचांग के अनुसार, हर महीने की तरह नवंबर में भी दो प्रदोष व्रत पड़ेंगे. नवंबर महीने का दूसरा प्रदोष व्रत मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाएगा. यह प्रदोष व्रत मार्गशीर्ष मास का पहला प्रदोष व्रत भी होगा. ऐसे में नवंबर का दूसरा प्रदोष व्रत 28 नवंबर 2024 को गुरुवार के दिन रखा जाएगा. शाम 6:23 से लेकर रात 8 बजे तक पूजा का शुभ समय है. पंडितजी ने बताया कि अगर आप इस शुभ मुहूर्त में शिव पूजन करेंगे तो व्रत का पूर्ण फल मिलेगा.

प्रदोष व्रत का महत्व
शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रदोष व्रत सबसे उत्तम माना जाता है. इसका व्रत करने से और विधिवत भगवान शिव की प्रदोष काल में उपासना करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है. साथ ही प्रदोष व्रत करने से साधक को हर प्रकार के कष्ट से मुक्ति मिलती है.

इन नियमों का पालन करें
1. प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें.
2. इसके बाद पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करके भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें.
3. शिव परिवार का पूजन करें और भगवान शिव पर बेल पत्र, फूल, धूप, दीप आदि अर्पित करें. फिर प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें.
4. पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और शिव चालीसा का पाठ जरूर करें. इसके बाद ही अपना उपवास खोलें.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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