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Astro Tips For Dirty Langauge : अगर आप भी बात-बात में अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं तो इसका नकारात्मक प्रभाव आपके जीवन पर देखने को मिलता है. लेकिन कुछ सरल उपायों को अपनाकर आप अपनी वाणी को नियंत्रित कर सकते हैं …और पढ़ें

कैसे बनते हैं अपशब्द बोलने के योग?
हाइलाइट्स
- मंगल और राहु का मिलन अपशब्दों का कारण बनता है.
- गायत्री मंत्र का जाप वाणी को नियंत्रित करता है.
- तुलसी के पत्ते का सेवन मानसिक शांति देता है.
Astro Tips For Dirty Langauge : हमारे समाज में अपशब्दों का प्रयोग न सिर्फ व्यक्ति की छवि को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है, बल्कि यह सामाजिक और मानसिक सेहत के लिए भी हानिकारक है. ज्योतिष के दृष्टिकोण से देखा जाए तो किसी व्यक्ति का गाली-गलौज या अपशब्दों का प्रयोग उसके ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है. ऐसे लोग जो लगातार अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं, वे अक्सर अपने जीवन में कुछ न कुछ ग्रह दोषों से ग्रसित होते हैं. आइए जानते हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से कि अपशब्द बोलने की आदत कैसे बनती है और इसे कैसे सुधारा जा सकता है.
अपशब्द बोलने का योग और ज्योतिषीय कारण
ज्योतिष शास्त्र में माना जाता है कि हमारी वाणी पर ग्रहों का गहरा प्रभाव पड़ता है. जब किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल और राहु ग्रह का मिलन होता है, तो इसे अंगारक योग कहा जाता है. यह योग व्यक्ति में अत्यधिक क्रोध और चिड़चिड़ापन उत्पन्न करता है, जिसके कारण व्यक्ति अपशब्दों का प्रयोग करने लगता है. ऐसे लोग अक्सर बिना सोचे-समझे बोलते हैं और किसी भी विवाद में उलझने के लिए तैयार रहते हैं.
इसके अलावा, कुंडली के दूसरे, तीसरे और आठवें भाव का वाणी से सीधा संबंध होता है. यदि इन भावों में अशुभ ग्रह उपस्थित होते हैं, तो व्यक्ति की वाणी में विकृति आ सकती है. खासकर राहु और मंगल के प्रभाव से व्यक्ति के शब्दों में गुस्सा और नकारात्मकता दिखाई देती है. शनि के प्रभाव में भी अपशब्दों का प्रयोग हो सकता है. बुध के अशुभ प्रभाव से कभी-कभी व्यक्ति सोच-समझकर अपशब्द नहीं बोलता, लेकिन उसकी वाणी में तीव्रता और आक्रोश होता है.
कैसे सुधारें अपशब्दों का प्रयोग करने की आदत?
यदि आप या आपके आसपास कोई व्यक्ति इस आदत से ग्रसित है, तो ज्योतिष में कुछ उपाय दिए गए हैं जिनसे इस आदत को सुधारा जा सकता है-
1. सुबह सूरज को अर्घ्य अर्पित करें – यह आपको मानसिक शांति और शक्ति प्रदान करेगा.
2. गायत्री मंत्र का जाप करें – यह वाणी को नियंत्रित करने और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने में सहायक है.
3. तुलसी के पत्ते का सेवन करें – तुलसी को पवित्र माना जाता है और यह मानसिक शांति प्रदान करता है.
4. शुद्ध आहार लें – खानपान में संतुलन बनाए रखें और अधिकतर दूध से बनी चीजों का सेवन करें.
5. लेब्राडोराइट पत्थर धारण करें – यह पत्थर मानसिक शांति और अच्छे विचारों को बढ़ाता है.
6. हरे रंग का प्रयोग करें – हरा रंग मन को शांति और संतुलन प्रदान करता है.
February 14, 2025, 07:10 IST
जब कुंडली में बनता है ऐसा योग, व्यक्ति बोलने लगता है अपशब्द, कैसे ठीक करें आदत