Home Uncategorized पहली बार रख रही हैं हरतालिका तीज व्रत? नवविवाहिता जरूर रखें इन...

पहली बार रख रही हैं हरतालिका तीज व्रत? नवविवाहिता जरूर रखें इन बातों का ध्यान, उज्जैन के पंडित से जानें

0
8


उज्जैन. हिंदू धर्म में महिलाओं के लिए कई ऐसे व्रत व उपवास हैं जो कि अखंड सौभाग्य की कामना से रखे जाते हैं. जैसे की हरियाली तीज, कजरी तीज और करवा चौथ ये सभी व्रत सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखती हैं. लेकिन इन सभी व्रतों में हरतालिका तीज का व्रत सबसे कठिन माना जाता है. हरतालिका तीज का व्रत रखने से वैवाहिक जीवन खुशहाल होता है. जो महिलाएं पहली बार हरतालिका तीज का व्रत रखने वाली हैं, उनको इस कठोर व्रत के नियमों के बारे में जानना चाहिए. यदि आप नियमपूर्वक हरतालिका तीज नहीं करती हैं तो आपका व्रत निष्फल हो जाएगा. हरतालिका तीज का व्रत में किन नियमों का पालन करना चाहिए आइए जानते है. उज्जैन के पंडित आंनद भारद्वाज से.

कब है हरतालिका तीज
हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 5 सितंबर, 2024 को दोपहर 12 बजकर 21 मिनट पर शुरू हो रही है. तिथि का समापन 6 सितंबर, 2024 को दोपहर 3 बजकर 1 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, शुक्रवार 6 सितंबर के दिन हरतालिका तीज का व्रत किया जाएगा. इस दौरान पूजा का मुहूर्त प्रातःकाल 6 बजकर 2 मिनट से सुबह 8 बजकर 33 मिनट तक रहेगा.

क्या है हरतालिका तीज का महत्व

यह व्रत महिलाओ रखती है. हरतालिका तीज का संबंध माता पार्वती से है. उनके पिता उनका विवाह भगवान विष्णु से कराना चाहते थे. लेकिन वह भगवान शिव को पति स्वरूप में पाना चाहती थीं. तब उनकी सहेलियों ने उनका अपहरण कर उनको घने जंगल में छिपा दिया. वहां माता पार्वती ने अपने कठोर तप से भगवान शिव को प्रसन्न किया, जिसके फलस्वरूप उनका विवाह हुआ.

जरूर रखें इस नियम का ध्यान
– हरितालिका तीज व्रत को कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, इस व्रत के दिन जल ग्रहण नहीं किया जाता, निर्जला व्रत होने के कारण ही हर कोई इसे नहीं ले पाता. इसलिए अगर आप पहली बार यह व्रत रखने वाली हैं, तो कुछ दिन पहले से ही खुद को मानसिक रूप से तैयार रखें.

– इस दिन विवाहित महिलाओं को 16 श्रृंगार करके शिव-पार्वती की पूजा करनी चाहिए.मेहंदी जरूर लगानी चाहिए. मान्यता है कि इससे भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं.

– इस व्रत का आरंभ सूर्योदय से पहले होता है. महिलाएं स्नान करके साफ वस्त्र इस दिन धारण करती हैं और भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करती हैं.

– पूजा के दौरान व्रत लेने वाली महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्तियों का विधिवत पूजन करती हैं. साथ ही, उन्हें पुष्प, धूप, दीप, चंदन, अक्षत, फल और मिठाई आदि अर्पित करती हैं.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version