सागर: बच्चों की खुशहाली के लिए मनोकामना मांगी थी. मनोकामना पूरी हुई तो आस्था से सराबोर नीलम ने दहकते अग्निकुंड में उतर गई. श्री देव खंडेराव का आशीर्वाद था, इसलिए नीलम को भय नहीं था कि उन्हें लाल दहकते अंगारों पर नंगे पैर चलना है. फिर हुआ भी ऐसा कि उन्होंने देवरी के श्री देव खंडेराव का जयकारा लगाया, अग्नि कुंड में हल्दी डाली और अंगारों के ऊपर से निकल गईं.
यह केवल एक नीलम या जानकी की कहानी नहीं है. इस तरह की सैकड़ों महिलाएं-पुरुष हर साल अग्नि कुंड से निकलते हैं. इन सभी कोई न कोई मनोकामना पूरी हुई होती है. इतना ही नहीं, कई नेता भी श्री देव खंडेराव की कृपा से नगर पालिका अध्यक्ष, विधायक यहां तक की मंत्री भी बन चुके हैं. इसके बाद वे यहां पर अंगारों पर चले हैं. कई लोग 30-35 साल से भी अधिक समय से यहां आते हैं और अंगारों पर से निकल रहे हैं.
34 साल से अंगारों पर से गुजर रहे पूर्व विधायक
ऐसे ही देवरी के एक पूर्व विधायक 34 साल से लगातार यहां लाल-लाल अंगारों पर से निकल रहे हैं. उनके भाई और उनकी पत्नी भी पहले इन अंगारों के ऊपर से निकल चुकी हैं. सुनील जैन बताते हैं कि विधायक बनने से पहले उन्होंने मनोकामना की थी जो श्री खंडेराव की कृपा से पूरी हुई. उस समय से हमने यहां आने की शुरुआत की थी जो आज भी निरंतर उन्हीं की कृपा से जारी है. यहां देशभर से लोग आते हैं.
एक छाला तक नहीं पड़ता
आगे बताया, श्री देव खंडेराव मंदिर में ऐसे नजारे देखकर लोग आश्चर्य चकित रह जाते हैं कि अगर गलती से एक माचिस की तीली भी हाथ में टच हो जाती है तो 2 दिन तक उसका दर्द रहता है, लेकिन यहां तो अग्नि कुंड में अंगारे भरे जाते हैं. उसमें से हल्दी डालकर दो बार निकलते हैं और किसी के पांव में एक छाला तक नहीं आता. यह यहां की महिमा है. यह श्री देव खंडेराव का चमत्कार है. इसमें अधिकांश संख्या में महिलाएं होती हैं.
1000 लोगों ने कराया रजिस्ट्रेशन
दरअसल, श्री देव खंडेराव मंदिर परिसर में इस साल अग्नि कुंड से निकलने के लिए 1000 से अधिक लोगों ने अपना रजिस्ट्रेशन करवाया है. चंपा छठ से यह मेला शुरू होता है और अगहन मास की पूर्णिमा तक यानी पूरे 9 दिन तक चलता है. इस बार 140 अग्नि कुंड बनाए गए हैं. देवरी के तिलक वार्ड में स्थित प्राचीन श्रीदेव खंडेराव मंदिर में मेला करीब 400 साल पुराना बताया जाता है. कहा जाता है कि देवरी जैसा मेला महाराष्ट्र में जाजौरी में भरता है, जहां देव श्री खंडेराव का मंदिर स्थित है.
FIRST PUBLISHED : December 8, 2024, 14:19 IST
