सुल्तानपुर: सुल्तानपुर के बारासिन गांव में स्थित मां जालपा धाम अपने आप में अनेक रहस्यों को समेटे हुए है. स्थानीय लोगों के मुताबिक एक क्षत्रिय को फांसी की सजा हुई थी, जिस पर मां जालपा धाम में उन्होंने मन्नत मांगी कि उनकी फांसी की सजा माफ हो जाए और उनकी यह मन्नत पूरी भी हो गई. जिसके बाद मां जालपा की प्रसिद्धि सुल्तानपुर जनपद समेत पूरे अवध क्षेत्र में हो गई. जहां दूर-दूर से लोग मां जालपा धाम में दर्शन करने के लिए आते हैं.
प्राचीन है मां जालपा धाम मंदिर
इस गांव के रहने वाले राम भोला तिवारी ने बताया कि मां जालपा धाम मंदिर ढाई सौ सालों से अधिक पुराना है. जहां लोग अपनी मन्नत मांगने के लिए आते हैं और माता उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इस मंदिर में मां जालपा की मूर्ति के साथ-साथ भगवान शंकर की प्रतिमा भी स्थापित की गई है और लगभग 200 वर्ष से अधिक पुराना एक पीपल का पेड़ है, जहां पर श्रद्धालु कलावा बांधकर चुनरी चढ़ाते हैं.
इस दिन लगता है विराट मेला
स्थानीय लोगों ने Bharat.one को बताया कि मां जालपा धाम में वर्ष की दोनों नवरात्रि की अष्टमी तिथि को विराट मेले का आयोजन किया जाता है. जिसमें 10000 से अधिक लोग शामिल होते हैं. इसके अलावा दीपावली के बाद यहां भव्य भंडारा किया जाता है. जिसमें दूर-दूर के श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करने आते हैं. मां जालपा धाम को प्रसाद के रूप में बताशा नारियल आदि चढ़ाया जाता है.
फांसी की सजा रोकने पर हुआ मंदिर निर्माण
सुल्तानपुर के बारासिन गांव स्थित मां जालपा धाम मंदिर वैसे तो ढाई सौ वर्ष से अधिक पुराना है, लेकिन इस मंदिर का निर्माण स्थानीय क्षत्रिय द्वारा करवाया गया था. राम भोला तिवारी के मुताबिक गांव के ही एक ठाकुर को फांसी की सजा हुई थी, जिस पर उन्होंने मां जालपा धाम से सजा रुकवाने की मन्नत मांगी और उनकी मन्नत पूरी भी हो गई. इसके बाद वह क्षत्रिय व्यक्ति घर तभी गया जब उसने मंदिर का निर्माण करवा दिया.
FIRST PUBLISHED : December 5, 2024, 10:06 IST
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.
