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बड़ी अलौकिक है इस पूजा स्थल की कहानी, गांव की रक्षा आज भी करते हैं ये बाबा, जानें मान्यता

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Palamu News: मंदोदर कुंअर बताती हैं कि उनका पैतृक गांव सिंगरा है. इस गांव में एक विशाल सेमर का पेड़ है, जिसे लोग आज भी श्रद्धा से ‘दरहा बाबा’ कहते हैं. यह पेड़ पूरे गांव की रक्षा करता है. उनके बचपन में इस पेड़ पर दो से तीन सांप हमेशा रहते थे. सांपों को देखकर लोग डर जरूर जाते थे. वे किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते थे.

देश के लगभग हर गांव में कोई न कोई ऐसा स्थान जरूर होता है, जिससे ग्रामीणों की गहरी धार्मिक आस्था जुड़ी रहती है. इन स्थानों से जुड़ी कहानियां पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती हैं. कई बार ये चमत्कार से कम नहीं लगतीं. झारखंड के पलामू जिले में भी ऐसी ही एक आस्था की कहानी आज भी लोगों के बीच जीवित है. डाल्टनगंज की रहने वाली 78 वर्षीय मंदोदर कुंअर जब अपने बचपन की बातें साझा करती हैं, तो सुनने वाले हैरान रह जाते हैं.

सिंगरा गांव और दरहा बाबा का पेड़
मंदोदर कुंअर बताती हैं कि उनका पैतृक गांव सिंगरा है. इस गांव में एक विशाल सेमर का पेड़ है, जिसे लोग आज भी श्रद्धा से ‘दरहा बाबा’ कहते हैं. यह पेड़ पूरे गांव की रक्षा करता है. उनके बचपन में इस पेड़ पर दो से तीन सांप हमेशा रहते थे. सांपों को देखकर लोग डर जरूर जाते थे. वे किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते थे. ग्रामीण उनकी पूजा करते थे. उन्हीं की वजह से गांव सुरक्षित रहता था.

खेतों में पड़ा रहता था अनाज, चोरी का डर नहीं
दादी के अनुसार उस समय किसान अपनी फसल खेतों में ही छोड़ देते थे. हजारों क्विंटल अनाज कई-कई दिनों तक खेतों में पड़ा रहता, लेकिन चोरी की कोई चिंता नहीं होती थी. हफ्तों तक अनाज वैसा का वैसा ही रहता था. ग्रामीणों का विश्वास था कि दरहा बाबा के पेड़ पर रहने वाले सांप ही खेतों और अनाज की रक्षा करते थे. इसी आस्था के कारण गांव में आपसी भरोसा और शांति बनी रहती थी.

डर, मन्नत और प्रत्यक्ष अनुभव
दरहा बाबा से जुड़ी मान्यता काफी पुरानी बताई जाती है. दादी कहती हैं कि यहां मांगी गई मन्नत जरूर पूरी होती है. रात के समय उस पेड़ के पास रुकने की सख्त मनाही थी और लोग वहां जाने से डरते थे. उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक बार खेत में चना बोने के लिए उन्हें उसी रास्ते से जाना पड़ा, जहां जाने से घर वालों ने मना किया था. वहां पहुंचते ही उन्हें सांप दिखाई दिए. वे डर गईं, लेकिन सांपों ने उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाया. इसके बाद वे दोबारा उस रास्ते पर कभी नहीं गईं.

संतों का जमावड़ा और आज की मान्यता
करीब 50 साल पहले वहां नागा बाबा का वास बताया जाता है, जो तपस्या किया करते थे। ग्रामीणों के अनुसार वे अत्यंत रहस्यमयी स्वभाव के थे. बाद में वे गुप्त धाम चले गए। आज भी मान्यता है कि दरहा बाबा में मन्नत पूरी होने पर लोग बकरी और मुर्गी की बलि चढ़ाते हैं. ग्रामीणों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है.

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