Why Did Draupadi become the wife of Pandavas: महाभारत के जब भी सबसे सशक्त और मजबूत महिला किरदारों की बात आती है तो सबसे पहले जो नाम दिमाग में आता है, वह है द्रौपदी का. पांचाल नरेश की बेटी और पांच पांडवों की पत्नी बनने वाली द्रौपदी का किरदार पूरी महाभारत में बेहद मजबूती से अपनी बात रखता और हर पल अपने पांचों पतियों के साथ खड़ा नजर आता है. लेकिन इन महाकाव्यों को सदियों से लोग पढ़ते आ रहे हैं और हर काल में इससे जुड़े कई सवाल भी खड़े होते हैं. ऐसा ही एक सवाल बार-बार सामने आता है कि ‘क्या द्रौपदी की मर्जी के बिना, सिर्फ कुंती के एक वचन के चलते उसे पांच-पांच पतियों की पत्नी बनना पड़ा था?’ क्या पांडवों की वधु बनने में पांचाली की मर्जी, उसकी इच्छा पूछी गई थी? आइए आपको आज इस सवाल का उत्तर देते हैं.
द्रौपदी नहीं थी अबला नारी
दरअसल महाभारत एक ऐसी विशाल कथा है, जिससे जुड़ी कई कहानियां सुनाई और कही जाती हैं. इतना ही नहीं कई बार महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित महाभारत से अलग भी कई तरह की कहानियां सुनाई जाती हैं. ऐसे में किसी भी कथा पर भरोसा करने से पहले बहुत जरूरी है कि हम ये जानें कि ये सच है या ‘मनगढ़ंत कहानी’. आजकल कई जगह सोशल मीडिया पर द्रौपदी को एक ऐसी अबला नारी के तौर पर दिखाया जाता है, जिसे उसकी मर्जी के खिलाफ बस ‘मां’ की आज्ञा पर 5 भाइयों की पत्नी बनना पड़ा. लेकिन महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित महाभारत का सत्य ऐसा नहीं है.
ऐसा नहीं है कि माता के कहते ही भाइयों ने द्रौपदी को 5 भाइयों की पत्नी बनाने का फैसला ले लिया. (फोटो साभार – leonardo.ai/)
कुंती ने कहा था कि ‘आपस में बांट लो’
महाभारत स्कॉलर और लेखिका अमी गणात्रा बताती हैं कि द्रौपदी पूरी महाभारत में कहीं भी ‘बेचारी’ या ऐसी अबला नारी नहीं है, जो अपनी बात खुलकर सामने नहीं रखती. वह हर प्रसंग में अपनी बात खुलकर रखती हैं. लोगों के बीच हमारे ग्रंथों के बीच ऐसी भ्रांतियां इसलिए फैलती हैं, क्योंकि हम हमारे ग्रंथ पढ़ते ही नहीं हैं, बल्कि उन्हें सुनने पर भरोसा करने लगते हैं. अमी गणात्रा बताती हैं, ‘जब बात द्रौपदी के पांच पतियों की आती है तो स्वयंवर में जीतने के बाद अर्जुन और पांचों भाई द्रौपदी के साथ माता कुंती के पास पहुंचते हैं. हां ये सही है कि माता कुंती ने कहा था कि ‘आपस में बांट लो.’ लेकिन जैसे ही उन्होंने देखा कि द्रौपदी है तो उन्हें धक्का लगा. वो अपनी बात पर पश्चाताप भी करती हैं. लेकिन ऐसा नहीं है कि माता के कहते ही भाइयों ने द्रौपदी को 5 भाइयों की पत्नी बनाने का फैसला ले लिया.’
द्रौपदी के रूप पर पांचों पांडव से आसक्त
लेखिका अमी गणात्रा बताती हैं कि ‘युद्धिष्ठिर माता की बात सुनने के बारे में सोचते हैं और फिर उनके और अर्जुन के बीच संवाद होता है. इस सवांद में पांचों भाई, माता कुंती और द्रौपदी भी बैठी है. यानी ये बातें सबके सामने हुईं हैं. तब युद्धिष्ठिर कहते हैं, ‘अर्जुन द्रौपदी का स्वयंवर तुमने जीता है, इसलिए तुम्हें विवाह करना चाहिए. पर अर्जुन कहता है, आप जेष्ठ हैं, तो आपका विवाह न हो तब तक मैं कैसे विवाह कर सकता हूं.’ अमी बताती हैं कि महाभारत में और भी ऐसे उल्लेख हैं कि जो स्वयंवर जीता है, वह अपने भाई या मित्र के लिए स्त्री को जीत सकता है. जैसे युद्धिष्ठिर की जो पत्नी, कलिंग से हैं, उसे कर्ण ने जीता था दुर्योधन के लिए. तो अर्जुन उस नाते बड़े भाई को समझाता है. इस संवाद का पूरा चित्रण महाभारत में है कि जब ये संवाद हो रहा है तो कुंती सारे भाइयों को देख रही है, और सारे भाई द्रौपदी को देखे जा रहे हैं. युद्धिष्ठिर भी द्रौपदी को देख रहे हैं और अपने भाइयों को भी देख रहे हैं. उन्हें ये महसूस हो गया है कि उनके सारे भाई द्रौपदी के प्रति आसक्त हो गए हैं. क्योंकि द्रौपदी अत्यंत रूपवान और तेजवान स्त्री है. और ऐसा नहीं है कि ये विवाह के बाद हुआ है. जब ब्राह्मण के रूप में पांडवों को एक ब्राह्मण ने द्रौपदी के रूप के बारे में बताया था, तभी सारे भाई उसके प्रति प्रेमासक्त हो चुके थे.’
द्रौपदी अत्यंत रूपवान और तेजवान स्त्री है. (फोटो साभार – leonardo.ai/)
‘सर्वेशाम भार्याम भविष्यति’
अपने भाइयों को देखकर युद्धिष्ठर ये समझ चुके थे कि अगर एक से भी द्रौपदी की शादी हुई तो हम जो भाई एकत्रित हैं, वह एकत्रित नहीं रह पाएंगे. उनकी जो एकता है, वह टूट जाएगी. तब युद्धिष्ठर कहते हैं, ‘सर्वेशाम भार्याम भविष्यति’ यानी द्रौपदी हम सबकी भार्या बनेगी. इस पूरे चित्रण में न तो कोई भाई विरोध करता है, न द्रौपदी विरोध करती है. और यहां समझने की बात ये है कि द्रौपदी ऐसी स्त्री नहीं है जो चुपचाप किसी की बात सुनकर अपने मन की बात न कहे या कोई भी फैसला अपने ऊपर थोपा जाए और वह उसे ले ले. उसने हर समय अपना पक्ष रखा है. इस पूरे चित्रण में द्रौपदी कहीं भी दुखी या भावुक नहीं दिखाई गई है. बल्कि ये फैसला होने के बाद कुंती मां उसे सारे भाइयों की पसंद-नापसंद बताने लगती हैं और द्रौपदी भी खुशी-खुशी उनके साथ चल देती है.’
FIRST PUBLISHED : January 8, 2025, 07:55 IST
