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राम मंदिर में पहली बार मनाया जा रहा कृष्ण जन्मोत्सव, पंजीरी-पंचामृत से लगेगा रामलला को भोग

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अयोध्या: पूरे देश में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम है. कहीं कृष्ण जन्माष्टमी 26 अगस्त को मनाई गई, तो कहीं आज यानी 27 अगस्त को नंदलाला जन्म लेंगे. प्रभु राम की नगरी अयोध्या में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व आज यानी 27 अगस्त को मनाया जाएगा. बालक राम के दरबार में प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली बार भगवान कृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम के साथ मनाई जायेगी. भगवान कृष्ण की जन्माष्टमी के मौके पर अयोध्या का राम मंदिर फूलों से सजाया गया है. सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. इतना ही नहीं भगवान को जन्माष्टमी के मौके पर लगभग 20 कुंतल पंजीरी का भोग लगाया जाएगा, तो 70 से 80 किलो पंचामृत से भगवान राम का पहली बार विराजमान होने के बाद अभिषेक किया जाएगा. उसके बाद राम भक्तों में यह प्रसाद वितरित किया जाएगा.

भगवान रामलला के भव्य मंदिर में पहला कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा. हालांकि रामलला के प्रांगण में जन्मोत्सव 27 अगस्त को मनाया जाएगा, जिसको लेकर विशेष तैयारी की गई हैं. रामलला को लगभग 18 से 20 कुंतल अलग-अलग तरह की पंजीरी का भोग लगाया जाएगा. तो 70 से 80 किलो चरणामृत का भोग लगाया जाएगा. इस भोग को लगाने के बाद प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा. 27 अगस्त की रात 12:00 बजे रामलला के कपाट भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के लिए खलेंगे. 12 बजे घंट घड़ियाल के बीच कृष्ण जी का जन्मोत्सव मनाया जायेगा.

राम मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि राम मंदिर में भव्य और दिव्य रूप से लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव आज मनाया जाएगा. प्रभु राम के दरबार में जन्मोत्सव के मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. मंदिर को सजाया जाएगा. धूमधाम के साथ कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा. मंदिर में प्रकाश की भी व्यवस्था हो गई है. सांस्कृतिक कार्यक्रम चल रहे हैं. जिसमें पंजीरी और पंचामृत का भोग लगाया जाएगा. पंचामृत से भगवान का अभिषेक किया जाएगा. कई प्रकार के पंजीरी का भोग लगाया जाएगा. भगवान कृष्ण के जन्म होने के बाद इसको भक्तों में वितरित किया जाएगा.

प्रभु राम का भोग प्रसाद बनाने वाली श्यामा यादव ने भी बताया कि अयोध्या में प्रभु राम के प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली बार कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जा रहा है. जिसमें तीन प्रकार की पंजीरी का भोग लगाया जाएगा. पंजीरी 18 से 20 कुंतल है. साफ और सात्विक तरीके से बनाया गया है. लगभग तीन दिनों में यह प्रसाद तैयार किया गया है. जिसमें 70 से 80 किलो पंचामृत भी है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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