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श्राद्ध पक्ष में इन रूपों में आते हैं पितर…भूलकर भी न करें ये गलती, छिन जाएगा सुख चैन

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Pitru paksha rituals : माना जाता है कि जब पितर धरती पर आते हैं तो वे अपने वंशजों की भलाई के लिए आशीर्वाद देकर जाते हैं. इस दौरान श्रद्धा और सम्मान के साथ उनका स्मरण किया जाए तो परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती ह…और पढ़ें

ऋषिकेश. हिंदू धर्म में श्राद्ध पक्ष का विशेष महत्त्व है. इसे पितृ पक्ष भी कहा जाता है. यह समय पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके प्रति आभार प्रकट करने का होता है. मान्यता है कि पितर हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा से आश्विन मास की अमावस्या तक 15 दिनों के लिए धरती पर आते हैं और अपने वंशजों की ओर से किए गए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध को स्वीकार करते हैं. इस अवधि को पितरों का पावन पर्व माना जाता है.

Bharat.one से बातचीत में पुजारी शुभम तिवारी बताते हैं कि श्राद्ध पक्ष में पितरों का आगमन केवल धार्मिक मान्यता ही नहीं बल्कि ये जीवन मूल्यों और कर्तव्य की याद भी दिलाता है. माना जाता है कि जब पितर धरती पर आते हैं तो वे अपने वंशजों की भलाई के लिए आशीर्वाद देकर जाते हैं. यदि इस दौरान श्रद्धा और सम्मान के साथ उनका स्मरण किया जाए तो परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. अगर अनादर या उपेक्षा की जाती है तो जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है.

किन रूपों में आते हैं पितर

धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं के अनुसार, पितर विभिन्न रूपों में धरती पर आते हैं. सबसे आम रूप पक्षियों का माना जाता है. विशेषकर कौवा पितरों का प्रतीक माना जाता है. जब भी श्राद्ध के दौरान भोजन बनाकर बाहर रखा जाता है और कौवा आकर उस भोजन को ग्रहण करता है तो यह शुभ माना जाता है. कबूतर और गौरैया को भी पितरों के आगमन का रूप समझा जाता है. यह भी माना जाता है कि पितर साधु-संत या भिक्षुक के रूप में भी घर के आसपास आते हैं. ऐसे में किसी साधु, फकीर, भिखारी या जरूरतमंद का अपमान करना या उन्हें खाली हाथ लौटाना अशुभ माना जाता है. पितरों की कृपा पाने के लिए दान-पुण्य करना और जरूरतमंदों की मदद करना इस अवधि में अत्यंत लाभकारी होता है.

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क्यों नहीं करना चाहिए अपमान

श्राद्ध पक्ष में पितरों का अपमान करना सबसे बड़ा दोष माना गया है. यदि कौवे या अन्य पक्षियों को अनदेखा कर दिया जाए, उन्हें दाना-पानी न दिया जाए या साधु-संतों का अपमान किया जाए तो इसे पितरों का अपमान समझा जाता है. इसका प्रभाव परिवार की समृद्धि और स्वास्थ्य पर नकारात्मक रूप से पड़ सकता है. यह भी मान्यता है कि पितरों का अपमान करने से वंश वृद्धि में बाधा आती है और जीवन में बार-बार परेशानियां उत्पन्न होती हैं. पितृ पक्ष में पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए तर्पण और पिंडदान के साथ-साथ दान-पुण्य अवश्य करना चाहिए. ब्राह्मणों को भोजन कराना, गरीबों को अन्न और वस्त्र देना और पक्षियों को दाना-पानी खिलाना पुण्यकारी माना जाता है. घर में साफ-सफाई बनाए रखना, सात्विक भोजन करना और श्रद्धा के साथ पितरों का स्मरण करना जरूरी है.

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श्राद्ध पक्ष में इन रूपों में आते हैं पितर…भूलकर भी न करें ये गलती

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