भीलवाड़ा : भीलवाड़ा में लगातार सर्दी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. शीतलहर के बीच जहां हाड़ कंपा देने वाली ठंड में आमजन जीवन प्रभावित हो रहा है तो सर्दी का असर भगवान के मंदिर में भी देखने को मिल रहा है, जहां भगवान को भी सर्दी से बचाने के लिए विभिन्न प्रकार से जतन किए जा रहे हैं, भगवान को गर्म वस्त्र और सर्दी के व्यंजनों का भोग लगाया जा रहा है. ऐसा ही नजारा भीलवाड़ा शहर के पेच एरिया बालाजी मंदिर में देखने को मिला है.
इस दौरान हनुमानजी महाराज को सर्दी के प्रकोप से बचाने के लिए उन्हें ऊनी वस्त्रों का चोला चढ़ाया गया है इसकी खास बात यह है कि विभिन्न प्रकार की ऊन का इस्तेमाल किया गया है. यह केवल साल में सिर्फ एक बार ही बालाजी महाराज को पहनाया जाता है. इस मनमोहक दृश्य को देखने के लिए बड़ी तादाद में मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी हुई है. वहीं इसके साथ पोष माह के तहत भगवान के पोष बड़े का भी भोग लगाया गया है.
पेच एरिया बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित आशुतोष शर्मा ने कहा कि हनुमानजी महराज को करीब 31 वर्षों से सर्दी को देखते हुए ऊनी वस्त्रों का चोला चढ़ाया जाता है. जब सर्दी की शीत लहर ज्यादा बढ़ जाती है तो ऐसे में भगवान को सजीव मानते हुए 10 घंटे की मेहनत यह चोला चढ़ाया जाता है. भगवान के इस मनमोहक रूप को देखने के लिए दूर-दूर से भक्त दर्शन करने के लिए पहुंच रहे हैं. वहीं भगवान को पोष बड़े का भी भोग लगाया गया है.
अलग-अलग प्रकार की ऊन का होता है प्रयोग
मुख्य पुजारी पंडित आशुतोष शर्मा ने बताया कि भगवान के इस चोले में अलग-अलग प्रकार की ऊन का प्रयोग किया जाता है. इसकी सबसे बड़ी खास बात यह है कि यह चोला साल में केवल सिर्फ एक बार भगवान को चढ़ाया जाता है. वह भी शीतलहर के दौरान भगवान को सजीव मानते हुए यह चोला चढ़ाया जाता है जिस तरह एक आम व्यक्ति को सर्दी लगती है उसी प्रकार यह माना जाता है कि भगवान को भी ऊनी वस्त्र पहने जाए जाने चाहिए. यहां मात्र बालाजी महाराज के दर्शन करने से भक्तों की मनोकामना पूरी हो जाती हैं जिसके चलते दूर-दूर से भक्त यहां दर्शन करने के लिए आते है.
FIRST PUBLISHED : January 8, 2025, 12:39 IST
