सागर: मध्य प्रदेश के सागर में सिलारी गांव है. यहां प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में अग्नि मेला लगता है. कुंड में भरे दहकते अंगारों से श्रद्धालु नंगे पैर निकलते हैं, जिन्हें देखकर लोगों की आंखें फटी रह जाती हैं, मगर जो अंगारों से निकलते हैं, उनके पैरों में छाले तक नहीं पड़ते. यहां हर साल अंगारों पर से निकालने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. पहले ये परंपरा एक दिन की होती थी, लेकिन अब दो दिन अग्निकुंड भरने लगा है.
अग्निकुंड मेले को देखने के लिए गांव और उसके आसपास के सैकड़ों लोग पहुंचते हैं. यह मेला अगहन मास की अमावस्या और प्रतिपदा तिथि को भरता है. सुबह पूजन अर्चन के बाद अग्निकुंड में हल्दी डालकर उसके ऊपर से निकलते हैं. इसमें कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो 20 साल, 30 साल, 15 साल से लगातार अपनी आस्था के अनुसार दहकते अंगारों के ऊपर से निकलते आ रहे हैं.
छात्राओं ने दिखाई आस्था
छात्रा श्रद्धा ने बताया कि अंगारों से निकलने के बाद उन्हें कोई तकलीफ नहीं हुई. पैरों में छाले नहीं आए. हनुमानजी उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं. इसी तरह छात्रा सोनम ने बताया कि पहली बार अंगारों पर से निकली हूं, उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई. अंगारों से निकलने पर पैर नहीं जले. मंदिर के पुजारी राजेश पाठक ने बताया कि सिलारी में हनुमान मंदिर परिसर में 30 साल से अग्नि मेले का आयोजन चल रहा है, जहां हनुमानजी की कृपा से श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण होती है
कैसे हुई थी परंपरा शुरू
बताया जाता है कि 30 साल पहले गांव के राजाराम पटेल को स्वप्न आया था कि अगर वह हनुमान मंदिर में अग्नि कुंड बनाकर उसके ऊपर से निकले तो मनोकामना पूर्ण हो जाएगी. सबसे पहले राजाराम ने ही इसकी शुरुआत की थी. इसके बाद से लगातार श्रद्धालु अपनी मनोकामना को पूर्ण करवाने के लिए अंगारों के ऊपर से निकल रहे हैं. यह परंपरा 30 साल से चली आ रही है. इस बार 50 से ज्यादा लोग इन अंगारों पर से 2 दिन में निकले.
तपस्वी महाराज लाए थे प्रतिमा
श्रीदेव हनुमान मंदिर सिलारी में प्रसिद्ध प्रतिमा है. माना जाता है कि हनुमानजी को तपेश्वरी महाराज अपने कंधे पर बैठाकर चार धाम परिक्रमा को निकले थे. हर जगह थोड़ा-थोड़ा विश्राम करते हुए आगे बढ़ते थे. जैसे ही सिलारी आए विश्राम किया तो फिर हनुमानजी को पुनः कंधे पर बैठाने की कोशिश की. लेकिन, हनुमानजी की प्रतिमा वहां से उठी नहीं. तब से हनुमानजी निरंतर प्रतिमा के रूप में सिलारी में ही विद्यमान हैं. बाद में उस स्थान पर हनुमान मंदिर बनाया गया. तपेश्वरी महाराज हनुमानजी के मंदिर के पीछे समाधि के रूप में विराजित हैं.
FIRST PUBLISHED : December 2, 2024, 21:57 IST
