अजमेर:- इस बार नए साल में 12 अमावस्या आएगी. इनमें दो बार शनि अमावस्या और एक बार सोमवती अमावस्या आएगी. हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को खास माना गया है और धर्म ग्रंथों में चंद्रमा की 16वीं कला को अमा कहा गया है. इस दिन पितरों और पीपल की पूजा करने का विधान है. ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं, इनमें शनि अमावस्या और सोमवती अमावस्या का महत्व अधिक है.
साल में इतनी बार अमावस्या
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष दो बार शनि अमावस्या और एक बार सोमवती अमावस्या आएगी. हिंदू धर्म में वर्षभर में 12 अमावस्या होती हैं. यानी हर माह एक अमावस्या आती है. अमावस्या तिथि कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन होती है और इस दिन आकाश में चांद दिखाई नहीं देता. पंडित सुरेंद्र राजगुरु ने Bharat.one को बताया कि अमावस्या का हिन्दू समाज में काफी महत्व है. अमावस्या की रात काली होती है और इस दिन पितरों को पूजने का विधान होता है. सालभर में 12 अमावस्या आती है. दिन के हिसाब से जब अमावस्या सोमवार, मंगलवार और शनिवार को आती है, तब महत्व बढ़ जाता है.
कब-कब आएगी अमावस्या तिथि
पंडित सुरेंद्र राजगुरु ने Bharat.one को आगे बताया कि अमावस्या तिथि माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 29 जनवरी, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 27 फरवरी, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 29 मार्च, वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 27 अप्रैल, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 27 मई, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 25 जून, श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 24 जुलाई, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या 23 अगस्त, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या 21 सितंबर, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या 21 अक्टूबर, मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या 20 नवंबर और पौष मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या 19 दिसंबर को आएगी.
FIRST PUBLISHED : December 15, 2024, 11:14 IST
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