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guruwar vrat in auspicious yog 2025 know lord Vishnu puja vidhi and muhurat and importance of guruwar vrat | नवंबर के अंतिम गुरुवार व्रत में इन बातों का रखें विशेष ध्यान, जानें विष्णु पूजा की विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त

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Guruwar Vrat 2025: मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को इस बार गुरुवार का दिन है. गुरुवार के दिन भगवान विष्णु और देवताओं के गुरु बृहस्पति को समर्पित है. इस दिन श्रीहरि और गुरु ग्रह का व्रत रखकर विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करने से सुख-शांति और समृद्धि आती है और कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति मजबूत होती है. गुरुवार के दिन कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. गुरुवार का व्रत कई घरों में किया जाता है और इस दिन पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु के साथ केले के वृक्ष की पूजा की जाती है. आइए जानते हैं किस तरह गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा, जानें महत्व और शुभ मुहूर्त….

गुरुवार पंचांग 2025
द्रिक पंचांग के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय दोपहर 1 बजकर 28 मिनट से शुरू होकर दोपहर 2 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. इस तिथि को कोई विशेष पर्व नहीं है, लेकिन दिन के हिसाब से आप गुरुवार का व्रत रख सकते हैं. इस दिन सूर्य वृश्चिक राशि में और चंद्रमा दोपहर 2 बजकर 7 मिनट तक मकर राशि में रहेगा. इसके बाद कुंभ राशि में संचार करेंगे.

गुरुवार पूजा का महत्व
अग्नि पुराण, बृहस्पति स्मृति और महाभारत जैसे ग्रंथों में गुरुवार व्रत का उल्लेख मिलता है, जिसमें बताया गया है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने मात्र से ही धन, विद्या और वैवाहिक सुख-सौभाग्य में लाभ मिलता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री हरि की पूजा-अर्चना करने, गुरुवार के दिन व्रत करने व कथा सुनने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. ग्रंथों में उल्लेख है कि अगर व्रत के दिन नियमों का पालन न किया जाए, तो भगवान श्री हरि विष्णु नाराज भी हो जाते हैं. अगर कोई भी जातक गुरुवार व्रत की शुरुआत करना चाहता है, तो वह किसी भी शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार से कर सकता है और 16 गुरुवार व्रत रख कर उद्यापन कर दें.

गुरुवार पूजा विधि
– ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करें.
– भगवान विष्णु को हल्दी, पीला फूल, अक्षत, तुलसी दल, पीली दाल अर्पित करें और माता लक्ष्मी की भी पूजा करें.
– भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की देसी घी से आरती करें.
– ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें और श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें.
– साथ ही केले के वृक्ष की भी पूजा करें. साथ ही आटे की लोई में चने की दाल और गुड़ मिलाकर गाय को खिलाएं.
– व्रत करने पर केवल बेसन/पीली दाल या बिना नमक का भोजन करें.
– किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को केला, चने की दाल, पीली वस्तुएं दान करें.

गुरुवार पूजा मुहूर्त 2025
ब्रह्म मुहूर्त: 05:05 ए एम से 05:59 ए एम
अभिजित मुहूर्त: 11:48 ए एम से 12:30 पी एम
निशिता मुहूर्त: 11:42 पी एम से 12:36 ए एम, 28 नवंबर

गुरुवार व्रत में इन बातों का रखें ध्यान
माना जाता है कि जो गुरुवार के दिन व्रत रखते हैं, उन्हें पीले वस्त्र धारण करने चाहिए. साथ ही, पीले फल-फूलों का दान करना चाहिए, लेकिन इस बात का विशेष ध्यान रहे कि पीली चीजों का सेवन ना करें. जो जातक व्रत नहीं रख सकते, वे विधि-विधान से पूजा कर या तो व्रत कथा सुनें या फिर पढ़ लें. वहीं, पूजा के दौरान भगवान विष्णु को हल्दी चढ़ाने से मनोकामना पूरी होती है और पुण्य फल की प्राप्ति होती है. गुरुवार के दिन किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न और धन का दान करने से भी पुण्य प्राप्त होता है. मान्यता है कि केले के पत्ते में भगवान विष्णु का वास होता है. इसी कारण गुरुवार के दिन केले के पत्ते की पूजा की जाती है.

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