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Kahalgaon Madhurendra Kumar made 15 feet Maa Saraswati from 20 ton NTPC ash

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Bhagalpur Sand Art Saraswati Puja 2026: भागलपुर के कहलगांव में सरस्वती पूजा पर अनोखा नजारा दिखा. अंतरराष्ट्रीय कलाकार मधुरेंद्र कुमार ने एनटीपीसी की 20 टन राख से मां शारदे की दिव्य प्रतिमा बनाई. लंदन बुक ऑफ रिकॉर्डधारी कलाकार की इस अद्भुत कला को देखने उमड़ रही भारी भीड़.

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भागलपुर: विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा में अब बस कुछ ही घंटे शेष हैं. पूरे जिले में भक्ति का माहौल है, लेकिन इस बार भागलपुर के कहलगांव में कुछ ऐसा हुआ है जिसकी चर्चा पूरे बिहार में हो रही है. जहां हर जगह मिट्टी की प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं. वहीं कहलगांव के एकचारी पंचायत में अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने अपनी कला से सबको हैरान कर दिया है. उन्होंने राख से मां सरस्वती की 15 फीट ऊंची प्रतिमा उकेरी है. इसमें कायले की राख का उपयोग किया गया है.

कोयले की राख से रची गई कलाकृति
देश-दुनिया में अपनी सेंड आर्ट के लिए विख्यात मधुरेंद्र कुमार ने इस बार एक अनोखा प्रयोग किया है. उन्होंने एनटीपीसी (NTPC) में बिजली उत्पादन के दौरान निकलने वाली 20 टन (20000 किलोग्राम) कोयले की राख का उपयोग कर मां सरस्वती की 15 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा उकेरी है. राख के इस विशाल ढेर को मां शारदे के दिव्य रूप में बदलना कला का एक अद्भुत नमूना है.

अद्भुत बनावट और शांति का संदेश
इस कलाकृति में मां सरस्वती को वीणा धारण किए और हंस की सवारी करते हुए दर्शाया गया है. उनके समीप मोर की एक मनोहर आकृति भी बनाई गई है. कलाकार मधुरेंद्र ने इस रचना के माध्यम से हैप्पी सरस्वती पूजा के साथ-साथ ज्ञान, रचनात्मकता और विश्व शांति का संदेश दिया है. श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों के लिए यह प्रतिमा आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है.

विश्व रिकॉर्डधारी कलाकार की अनोखी भेंट
कलाकार मधुरेंद्र कुमार किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. वे गंगा की रेत, समुद्र तट की बालू और पीपल के पत्तों पर अपनी कलाकारी के लिए जाने जाते हैं. अपनी इसी विशिष्ट कला के दम पर वे अब तक 50 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान जीत चुके हैं. मधुरेंद्र ऐसे पहले भारतीय कलाकार हैं जिनका नाम लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है. एकचारी पंचायत में ‘मां शारदे क्लब’ द्वारा आयोजित इस पूजा में मधुरेंद्र की यह कृति न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि पर्यावरण और अनुपयोगी चीजों (जैसे कोयले की राख) से सुंदरता रचने का एक बड़ा संदेश भी है.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और Bharat.one तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें

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भागलपुर में 20 टन राख से साक्षात प्रकट हुईं मां सरस्वती!आस्था-कला का दिखा संगम

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