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Tilkut Chauth 2025: तिल चतुर्थी का व्रत महिलाएं अपनी संतान के सुखी जीवन की कामना के लिए करती हैं. इस दिन माताएं प्रथम पूजनीय देवता भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए व्रत तथा पूजन करते हैं. जो व्यक्ति सच्चे मन से तिल चतुर्थी का…और पढ़ें
Tilkut Chauth 2025: हिंदू धर्म में सकट चौथ का व्रत बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन तिल चौथ का व्रत रखा जाता है. यह साल की बड़ी चौथ में एक मानी जाती है. इस दिन महिलाएं गणेश जी की पूजा कर उनसे अपनी संतान की सलामती की कमाना करती हैं. इसके साथ ही यह माना जाता है कि तिल चौथ के दिन गणेपति बप्पा की पूजा करने वालों के समस्त संकट और कार्यों में आने वाले विघ्न दूर हो जाते हैं.
ज्योतिषाचार्य पंडित रमाकांत मिश्रा बताते हैं कि इस बार माघ माह चतुर्थी तिलकुटा चौथ 17 जनवरी, शुक्रवार को मनाई जाएगी. अलग-अलग जगहों पर इसे तिलकुटा चौथ, वक्र-तुण्डि चतुर्थी और माघी चौथ भी कहा जाता है. तिल चौथ में कुछ विशेष सामग्री का होना आवश्यक होता है, इन वस्तुओं के बिना पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है. तो आइए जानते हैं कौन-कौन सी हैं वो सामग्रियां, जो कि तिलचौथ के दिन ना भूलें और क्या है खास सामग्री.
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तिल चौथ पूजा सामग्री
गणेश जी की मूर्ति, लकड़ी की चौकी, पीला या लाल कपड़ा
जनेऊ, मेहंदी, सिंदूर, अक्षत, हल्दी
सुपारी, पान का पत्ता, लौंग, रोली,
तिल, पान, आरती किताब, 21 गांठ दूर्वा
गाय का घी, फूल माला, इलायची, गुलाल
गंगाजल, लाल फूल, मौली, इत्र, अबीर
खास सामग्री – तिल, दूर्वा, पीले या लाल फूल, तिल से बना भोग. इसके बिना तिल चौथ पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है. इसलिए इन्हें याद से एक दिन पहले ही अपनी पूजा सामग्री में रख लें.
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तिलचौथ व्रत का महत्व
तिल चौथ व्रत का दिन देवी सकट को समर्पित है, माताएं इस दिन व्रत रखकर अपनी संतान के कष्टों को दूर करने की कामना करती हैं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से व गणपति जी की पूजा करने से स्त्रियों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है.
