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chandra grahan 2026 end time start chanting will reduce negative effects | जाप करने से कम होगा चंद्र ग्रहण का प्रभाव, शक्तिपीठ मां कल्याणी देवी मंदिर


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मध्य काल में पहुंच चुका चंद्र ग्रहण, जाप करने से कम होगा नकारात्मक प्रभाव

Last Updated:

Chandra Grahan 2026: साल 2026 का चंद्र ग्रहण शुरू हो चुका है लेकिन अभी यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दिया है. शास्त्रों में बताया गया है कि ग्रहण काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और मानसिक जप से फायदा मिलेगा. मंत्रों का जप करने से चंद्र ग्रहण का प्रभाव कम होता है और जीवन में मानसिक शांति भी मिलती है. आइए जानते हैं चंद्र ग्रहण के दौरान नकारात्मक प्रभाव कम करने के नियम.

Chandra Grahan 2026: साल का पहला चंद्र ग्रहण शुरू हो चुका है और अब ग्रहण मध्य काल में पहुंच चुका है लेकिन अभी तक यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दिया है. सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में घटित होने वाला यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू हो चुका था. चंद्र ग्रहण की वजह से उत्तर भारत समेत देशभर के कई मंदिर चंद्र ग्रहण की वजह से बंद हो चुके हैं. चंद्र ग्रहण का सूतक काल और ग्रहण दोनों का समापन 6 बजकर 48 मिनट पर होगा. इस ग्रहण की कुल 3 घंटे 27 मिनट की होने वाली है. शास्त्रो के अनुसार, ग्रहण काल के दौरान मंदिरों के पट बंद रहते हैं और इस दौरान मानसिक जप का विशेष लाभ बताया गया है.

शुद्धिकरण के बाद खोले जाएंगे मंदिरों के कपाट
रामलला मंदिर, तिरुमाला, प्रयागराज में स्थिति शक्तिपीठ मां कल्याणी देवी मंदिर के कपाट भी बंद हो चुके हैं. मंदिर के कपाट अब शाम को 7 बजे शुद्धिकरण के बाद खोले जाएंगे. मंदिर के पुजारी पंडित श्यामजी पाठक ने चंद्र ग्रहण के दौरान कुछ सावधानियां बरतने और जाप करने की भक्तों से अपील की है. धार्मिक परंपराओं के अनुसार ग्रहण के दौरान भोजन न करने और तुलसी के पत्ते भोजन में रखने की परंपरा है. ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है.

इस समय खोले जाएंगे मंदिरों के कपाट
पंडित श्याम जी पाठक ने बताया है कि यह 2026 का पहला चंद्र ग्रहण है. ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शाम 6 बजकर 48 मिनट तक रहेगा और इसका प्रभाव पूरे देश में देखने को मिलने वाला है. इस ग्रहण काल ​​में मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक साधना करने से सफलता प्राप्त होती है. चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है, और यहां मंदिर में सुबह 6 बजकर 20 के बाद से मंदिर के कपाट बंद हैं. मंदिर के कपाट शाम को 7 बजे खोले जाएंगे और सायंकाल आरती और शुद्धीकरण के बाद ही भक्त मां के दर्शन कर पाएंगे.

ग्रहण काल में यह कार्य निषेध
पंडित श्याम जी पाठक ने आगे बताया कि सूतक काल और ग्रहण में मूर्ति पूजन निषेध होता है और गर्भवती महिलाओं को खास सावधानी बरतनी पड़ती है, लेकिन बाकी सभी सामान्यजन जप, पाठ और साधना कर सकते हैं. ग्रहण काल में किया गया जप और साधना विशेष फलदायी होता है. घरों में लोग प्रतिमा पूजन से बचें और जाप करके भगवान से अच्छे जीवन की कामना करें. ग्रहण में अगर शक्ति मंत्रों या गुरु मंत्रों का जाप किया जाए तो मनोकामना पूर्ति जल्द होती है.

मंदिरों ने जारी की एडवाइजरी
बता दें कि आज चंद्र ग्रहण की वजह से अयोध्या, काशी समेत देश के ज्यादातर मंदिरों के कपाट बंद हैं. राम मंदिर और काशी विश्वनाथ मंदिर पहले ही एडवाइजरी जारी कर चुके हैं कि भक्त मंदिर की समय-सारणी के अनुसार दर्शन की प्लानिंग करें. दोनों मंदिरों के कपाट दिन के समय बंद होंगे और शाम को शुद्धिकरण के साथ खोले जाएंगे. वहीं बाबा महाकाल मंदिर के कपाट बंद नहीं होंगे, लेकिन बाबा पर ग्रहण के दौरान जल अर्पित नहीं किया जाएगा और भक्त भी गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर पाएंगे.

About the Author

Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें




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