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सर्दियों में क्यों है आंवला सबसे खास? बच्चों और बुजुर्गों के लिए बेस्ट, ऐसे करें सेवन और इम्यूनिटी बूस्ट – Uttarakhand News

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बागेश्वर: सर्दियों और संक्रमणों के मौसम में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आंवला एक बेहतरीन प्राकृतिक सुपरफूड माना जाता है. विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह फल पाचन सुधारने, त्वचा को ग्लो देने और बालों को मजबूत बनाने में भी बेहद फायदेमंद है.

सर्दियों के मौसम में उत्तराखंड के ग्रामीण बाजारों में आंवला बड़ी मात्रा में उपलब्ध होता है. विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह फल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बेहद कारगर माना जाता है. कुमाऊं क्षेत्र के बागेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और चंपावत में खेतों और बागों में इसकी खूब पैदावार होती है. स्थानीय लोग इसे नमक-मिर्च के साथ कच्चा खाते हैं, जबकि कई घरों में आंवला जूस, अचार और मुरब्बा भी बनाया जाता है. आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. ऐजल पटेल बताते हैं कि नियमित सेवन से पाचन सुधरता है और सर्दी-खांसी जैसी मौसमी बीमारियों से बचाव होता है.

उत्तराखंड की सर्दियों में आंवला जूस सबसे पसंदीदा घरेलू हेल्थ ड्रिंक माना जाता है. सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से शरीर को विटामिन C की भरपूर मात्रा मिलती है, जिससे इम्यूनिटी मजबूत होती है. बागेश्वर और अल्मोड़ा के ग्रामीण इलाकों में लोग घर पर ही आंवला उबालकर और पीसकर जूस तैयार करते हैं. यह न केवल संक्रमणों से बचाव करता है, बल्कि त्वचा को ग्लो देने और बालों को मजबूत बनाने में भी सहायक है. नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है और पेट की समस्याएं भी काफी हद तक कम होती हैं.

उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में आंवला चटनी हर घर की पसंदीदा रेसिपी है. खट्टे-मीठे स्वाद वाली यह चटनी न केवल भोजन का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि हेल्थ बूस्टर के रूप में भी जानी जाती है. आंवला, मिर्च, धनिया और गुड़ मिलाकर तैयार की जाने वाली यह पारंपरिक चटनी विटामिन C से भरपूर होती है. अल्मोड़ा और बागेश्वर के ग्रामीण बाजारों में ताजा आंवला आसानी से मिल जाता है. स्थानीय लोग इसे सर्दियों में प्रतिदिन खाने में शामिल करते हैं. यह चटनी पाचन सुधारने और शरीर को डिटॉक्स करने में भी मदद करती है.

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उत्तराखंड में सर्दियों के आते ही आंवला मुरब्बा बनाने का सिलसिला शुरू हो जाता है. हल्के मीठे स्वाद वाला यह मुरब्बा बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी की पसंदीदा डिश है. बागेश्वर, चंपावत और पिथौरागढ़ के घरों में इसे बड़े पैमाने पर तैयार किया जाता है. मुरब्बा न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि खून की कमी, कमजोरी और इम्यूनिटी की कमी जैसी समस्याओं में भी फायदेमंद माना जाता है. महिलाएं इसे कई दिनों तक धूप में सुखाकर तैयार करती हैं. सर्दियों में इसकी इतनी मांग होती है कि स्थानीय बाजारों में कई दुकानदार रेडी-मेड मुरब्बा भी बेचते हैं.

पहाड़ी इलाकों में आंवला पना सर्दियों में खासतौर पर पिया जाता है. यह पारंपरिक पेय न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि शरीर को गर्माहट और ऊर्जा भी देता है. पिथौरागढ़ और चंपावत में लोग आंवला उबालकर, मसाले और गुड़ मिलाकर इसे तैयार करते हैं. पना पाचन के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है और सर्दी-जुकाम से बचाव में भी मदद करता है. स्थानीय महिलाओं का कहना है कि यह प्राकृतिक पेय बच्चों को भी आसानी से पिलाया जा सकता है. बाजारों में ताजा आंवला मिलते ही घरों में इसे बनाना शुरू कर दिया जाता है.

उत्तराखंड में आंवला कैंडी पिछले कुछ सालों में काफी लोकप्रिय हुई है. मीठे और खट्टे स्वाद वाली यह कैंडी बच्चों में खास पसंद की जाती है. अल्मोड़ा, बागेश्वर और कौसानी के महिला समूह इसे बड़े स्तर पर तैयार कर स्थानीय बाजारों में बेच रहे हैं. विटामिन C से भरपूर यह कैंडी सर्दियों में इम्यूनिटी बढ़ाने में बेहद प्रभावी है. कैंडी लंबे समय तक खराब नहीं होती, इसलिए परिवार इसे स्टोर करके महीनों तक उपयोग करते हैं. यह पैकेज जंक फूड का सेहतमंद विकल्प भी है.

आंवले का अचार उत्तराखंड के पहाड़ी घरों में पीढ़ियों से बनाया जा रहा है. यह पारंपरिक अचार न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि सेहत का भी खजाना माना जाता है. बागेश्वर और अल्मोड़ा की महिलाएं आंवले को काटकर सरसों के तेल, मसालों और नमक के साथ मिलाकर अचार तैयार करती हैं. खास बात यह है कि सही तरीके से बनाया गया अचार एक साल तक खराब नहीं होता. यह भोजन के साथ स्वाद बढ़ाता है और शरीर को विटामिन C की निरंतर आपूर्ति करता है. सर्दियों में इसकी मांग बढ़ने पर दुकानों में भी ताजा आंवला अचार खूब बिकता है.

आंवला लड्डू उत्तराखंड में सर्दियों के सुपरफूड के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. कौसानी और चंपावत के घरों में आंवला पाउडर, तिल, गुड़ और सूखे मेवे मिलाकर यह पारंपरिक लड्डू तैयार किए जाते हैं. यह शरीर को गर्म रखने, खून बढ़ाने और सर्दी से बचाने में बेहद लाभकारी माने जाते हैं. बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी यह ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत है. स्थानीय बाजारों में भी अब ये लड्डू आसानी से मिलते हैं. आंवले का लड्डू प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट का सबसे आसान और स्वादिष्ट माध्यम है.

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