Wednesday, March 4, 2026
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Nobel Prize 2025 for Immune Tolerance Research | इम्यून टॉलरेंस की रिसर्च के लिए 3 वैज्ञानिकों को मिला नोबेल पुरस्कार


Last Updated:

Nobel-Winning Immune Research: चिकित्सा क्षेत्र में साल 2025 का नोबेल पुरस्कार अमेरिका के मैरी ब्रन्को, फ्रेड राम्सडेल और जापान के शिमोन सकागुची को मिला है. इन तीनों वैज्ञानिकों ने पेरिफेरल इम्यून टॉलरेंस की खोज कर यह बताया था कि हमारा इम्यून सिस्टम अपने ही शरीर पर हमला क्यों नहीं करता है. इस खोज से कई बीमारियों के इलाज में मदद मिल सकती है.

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इम्यून सिस्टम से जुड़ी रिसर्च के लिए इस साल मेडिसिन में नोबेल प्राइज दिया गया है.

Nobel Prize Winning Research in Medicine: चिकित्सा के क्षेत्र में अनोखी रिसर्च करने वाले 3 वैज्ञानिकों को नोबेल पुरुस्कार (Nobel Prize in Medicine) दिया गया है. यूएस की मैरी ब्रन्को, फ्रेड राम्सडेल और जापान के शिमोन सकागुची को इस प्रतिष्ठित पुरुस्कार से नवाजा गया गया है. इन तीनों वैज्ञानिकों ने इंसानी इम्यून सिस्टम की कार्यप्रणाली को बेहतर तरीके से समझने में क्रांतिकारी खोज की है. यह खोज पेरिफेरल इम्यून टॉलरेंस (Peripheral Immune Tolerance) से संबंधित है. यह रिसर्च बताती है कि हमारा इम्यून सिस्टम अपने ही शरीर की हेल्दी सेल्स पर हमला क्यों नहीं करता है. इन वैज्ञानिकों की रिसर्च से न केवल ऑटोइम्यून डिजीज के इलाज के नए रास्ते खुलेंगे, बल्कि कैंसर और ऑर्गन ट्रांसप्लांट में भी मदद मिलेगी.

रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक जापान के वैज्ञानिक शिमोन सकागुची ने 1990 के दशक में Regulatory T-Cells (T-regs) की पहचान की थी. ये T-Cells हमारे शरीर में इम्यून सिस्टम की गतिविधियों को कंट्रोल करती हैं, ताकि स्वस्थ कोशिकाओं पर अनावश्यक हमला न हो. ये कोशिकाएं इम्यून सिस्टम के शांति रक्षक के रूप में काम करती हैं और असंतुलन को रोकती हैं. इनकी भूमिका ऑटोइम्यून बीमारियों को रोकने में अहम मानी जाती है. अमेरिका की मैरी ब्रन्को और फ्रेड राम्सडेल ने यह खोज की कि T-regs के कार्य के पीछे FoxP3 नामक जीन का योगदान होता है. अगर इस जीन में कोई खराबी होती है, तो इम्यून सिस्टम अपने ही शरीर के अंगों पर हमला करने लगता है, जिससे कई गंभीर ऑटोइम्यून रोग हो सकते हैं. इस खोज ने वैज्ञानिकों को ऐसी बीमारियों की पहचान और उनके उपचार की दिशा में नई समझ दी है.

इन रिसर्च का उपयोग अब कैंसर इम्यूनोथेरेपी, ट्रांसप्लांट रिजेक्शन और अन्य ऑटोइम्यून डिजीज के इलाज में हो रहा है. इस रिसर्च की मदद से मरीजों को ज्यादा सटीक इलाज मिल सकता है, जिसमें कम साइड इफेक्ट्स होंगे. यह चिकित्सा विज्ञान में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. वर्तमान में दुनियाभर में करोड़ों लोग ऐसे ऑटोइम्यून रोगों से पीड़ित हैं, जिनमें शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली ही शरीर पर हमला करती है. इन बीमारियों में इलाज कठिन होता है और मरीज की जिंदगी मुश्किल हो जाती है. वैज्ञानिकों की यह खोज यह समझने में मदद करती है कि इम्यून सिस्टम कैसे अपनों को दुश्मन नहीं समझता है.

नोबेल पुरस्कार 2025 न केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि का सम्मान है, बल्कि यह आने वाले समय में लाखों लोगों के लिए एक नई उम्मीद भी है. यह खोज एक उदाहरण है कि बुनियादी शोध कैसे जटिल बीमारियों के ट्रीटमेंट के नए रास्ते खोल सकता है. इन वैज्ञानिकों की मेहनत ने इम्यून सिस्टम की जटिलता को सरल किया है और चिकित्सा जगत को एक नई दिशा दी है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ऑटोइम्यून डिजीज को लेकर वैज्ञानिकों की रिसर्च काफी महत्वपूर्ण हैं और भविष्य में इन रिसर्च के आधार पर नए ट्रीटमेंट डेवलप किए जा सकेंगे.

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय Bharat.one Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

अमित उपाध्याय Bharat.one Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्… और पढ़ें

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लाइलाज बीमारियों के इलाज का खोजा रास्ता, इन 3 वैज्ञानिकों को मिला नोबेल प्राइज


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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-nobel-prize-2025-in-medicine-brunkow-ramsdell-and-sakaguchi-honoured-for-immune-tolerance-breakthrough-9704917.html

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