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इस बार होली पर ग्रह-नक्षत्र का डबल अटैक, भद्रा और चंद्र ग्रहण के साये में होलिका दहन, जानें शुभ मुहूर्त

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Holika Dahan: पंडित प्रकाश जोशी बताते हैं कि उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में होली के साथ ही पहाड़ का लोक पर्व फूलदेई भी विशेष रूप से मनाया जाता है. इस बार 14 मार्च को यह पर्व कुमाऊं में बड़े हर्षोल्लास के साथ म…और पढ़ें

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15 मार्च को मनाई जाएगी कुमाऊं में होली 

हाइलाइट्स

  • कुमाऊं में 15 मार्च को होली मनाई जाएगी.
  • 13 मार्च को भद्रा काल के कारण होलिका दहन नहीं होगा.
  • फूलदेई पर्व 14 मार्च को कुमाऊं में मनाया जाएगा.

नैनीताल. इस साल होली को लेकर देशभर में तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है. जहां अधिकतर स्थानों पर 14 मार्च को रंगों का यह पर्व मनाया जाएगा, वहीं उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में 15 मार्च को होली खेली जाएगी. नैनीताल निवासी पंडित प्रकाश जोशी बताते हैं कि इस साल का पहला चंद्र ग्रहण 14 मार्च 2025, शुक्रवार को लगेगा. हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. इसका असर यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी-दक्षिणी अमेरिका, प्रशांत और अटलांटिक महासागर, उत्तरी-दक्षिणी ध्रुव सहित अफ्रीका के कुछ हिस्सों में रहेगा. चूंकि भारत में यह दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका कोई धार्मिक प्रभाव भी नहीं माना जाएगा. इसके चलते होली की तिथियों में बदलाव चंद्र ग्रहण के कारण नहीं हुआ है.

पंडित प्रकाश जोशी बताते हैं कि उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में होली के साथ ही पहाड़ का लोक पर्व फूलदेई भी विशेष रूप से मनाया जाता है. इस दिन घरों की देहरी पर फूल पूजे जाते हैं और वसंत के आगमन का स्वागत किया जाता है. उन्होंने कहा कि इस बार 14 मार्च को यह पर्व कुमाऊं में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा, इसलिए रंगों की होली अगले दिन यानी 15 मार्च को खेली जाएगी.

13 मार्च को नहीं होगा होलिका दहन
पंडित प्रकाश जोशी बताते हैं कि 13 मार्च को भद्र काल है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा काल में कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है. शास्त्रों में भी इसका जिक्र है.“भद्रायां द्वि न कर्त्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा श्रावणी नृप हन्ति च ग्राम्मियां दहति फाल्गुनी”. इसका अर्थ है कि श्रावणी पूर्णिमा भद्रा में मनाने से राजा का नाश होता है और फाल्गुनी पूर्णिमा भद्रा में मनाने से गांव में आग लगने का खतरा रहता है.

भद्रा का साया
उन्होंने बताया कि इस साल 13 मार्च को सुबह 10:36 बजे से लेकर मध्यरात्रि 11:30 बजे तक भद्रा काल रहेगा. ऐसे में होलिका दहन रात 11:30 बजे के बाद ही किया जा सकता है. धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष व्रत की पूर्णिमा 13 मार्च को ही मनाई जाएगी. उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में होली के अगले दिन छलड़ी या बसंतोत्सव मनाया जाता है. इस दिन लोग रंगों से सराबोर होकर उत्सव का आनंद लेते हैं.

15 मार्च को रंगों का त्योहार
उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश हिस्सों में 14 मार्च को होली खेली जाएगी, लेकिन उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थानीय परंपराओं के कारण 15 मार्च को रंगों का त्योहार मनाया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है, जिससे लोगों में किसी भी तरह का भ्रम न रहे.

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भद्रा और चंद्र ग्रहण के साये में होलिका दहन, जानें शुभ मुहूर्त

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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