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Ganesh Jayanti 2026: माघ शुक्ल चतुर्थी पर पढ़ें यह रहस्यमयी व्रत कथा, जानें कैसे बने गणेश विघ्नहर्ता

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Ganesh Jayanti 2026: हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है. कोई भी शुभ कार्य हो, उसकी शुरुआत गणपति की आराधना से ही की जाती है. माना जाता है कि गणेश जी की कृपा से जीवन में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं और कार्य सफल होते हैं. हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है, लेकिन माघ महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश जयंती के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है. वर्ष 2026 में भी माघ शुक्ल चतुर्थी को गणेश जयंती मनाई जाएगी. इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, गणेश जी की पूजा करते हैं और व्रत कथा का पाठ करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन कथा सुनने और पढ़ने से मन की उलझनें शांत होती हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं. खास बात यह है कि गणेश जयंती की कथा भगवान गणेश के जन्म और उनके विघ्नहर्ता स्वरूप को समझने में सहायता करती है. इसी कारण यह कथा श्रद्धा और विश्वास के साथ पढ़ी जाती है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

गणेश जयंती का महत्व
माघ शुक्ल चतुर्थी को गणेश जयंती, माघी गणेश चतुर्थी और वरद चतुर्थी भी कहा जाता है. इस दिन पूजा करने से बुद्धि, सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है. जो लोग नियमित रूप से गणेश जयंती का व्रत रखते हैं, उनके जीवन में आने वाली परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं. इस दिन विशेष रूप से कथा का पाठ करना फलदायी माना गया है.

गणेश जयंती व्रत कथा
यह कथा भगवान गणेश के प्रकट होने से जुड़ी है. पुराणों के अनुसार, माता पार्वती की दो सखियां जया और विजया थीं. उन्होंने एक दिन माता से कहा कि भगवान शिव के सभी गण केवल उनकी आज्ञा मानते हैं, माता पार्वती का कोई अपना रक्षक नहीं है. यह बात माता के मन में बैठ गई.

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एक दिन भगवान शिव माता पार्वती से मिलने उनके भवन पहुंचे. उस समय माता स्नान कर रही थीं. नंदी ने शिव जी को यह बात बताई, फिर भी वे भीतर चले गए. यह देखकर माता को बहुत दुख हुआ. उन्हें लगा कि अगर उनका कोई अपना द्वारपाल होता तो ऐसा नहीं होता.

Ganesh Jayanti 2026

माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से एक बालक बनाया और उसमें प्राण डाल दिए. उन्होंने उस बालक को अपना पुत्र मान लिया और उसे द्वार की रक्षा का कार्य सौंपा. कुछ समय बाद भगवान शिव फिर वहां पहुंचे, लेकिन बालक ने उन्हें भीतर जाने से रोक दिया. शिव जी उस बालक को नहीं जानते थे. गणों ने उसे हटाने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी सफल नहीं हुआ.

क्रोधित होकर भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से बालक का सिर काट दिया. जब माता पार्वती ने यह देखा तो वे अत्यंत क्रोधित हो गईं. उनके क्रोध से पूरे संसार में भय का माहौल बन गया. देवताओं ने माता से क्षमा मांगी. तब शिव जी ने आदेश दिया कि उत्तर दिशा में जो पहला जीव मिले, उसका सिर लाकर बालक के धड़ पर लगाया जाए.

देवताओं को एक हाथी मिला और उसका सिर बालक पर लगाया गया. शिव जी की कृपा से बालक जीवित हो उठा. सभी देवताओं ने उसे आशीर्वाद दिया और शिव जी ने उसे गणों का प्रमुख बनाया. तभी से वह गजानन गणेश कहलाए.

गणेश जयंती पर क्या करें
गणेश जयंती के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें. गणेश जी को दूर्वा, मोदक और लाल फूल अर्पित करें. व्रत कथा का पाठ शांत मन से करें और अंत में गणेश जी से जीवन की बाधाएं दूर करने की प्रार्थना करें.

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