धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा शिव मंदिर बैजनाथ जो कि अपनी प्रसिद्ध पौराणिक इतिहास के लिए जाना जाता है. एक बार फिर मकर संक्रांति के पर्व पर सजने के लिए बिल्कुल तैयार है. ऐतिहासिक प्राचीन शिव मंदिर बैजनाथ में सदियों से मकर संक्रांति पर मनाए जाने वाले सात दिवसीय घृतमंडल पर्व इस बार भी 14 जनवरी मकर संक्रांति से आयोजित किया जाएगा, जिसका शुभारंभ विधिवत पूजा अर्चना के साथ जलाभिषेक से किया जाएगा. आपको बता दें कि इस बार 3 क्विंटल घी से तैयार मक्खन से घृत मंडल में भोलेनाथ अगल ही रूप में नजर आएंगे. यह परंपरा शिव मंदिर बैजनाथ में सालों से निभाई जा रही है जिसका अपना आध्यात्मिक महत्व है और लोगों की इसके प्रति विशेष आस्था है.
जानकारी के अनुसार 14 जनवरी को सुबह आरती के उपरांत विधिवत पूजा-अर्चना के साथ ही पुजारियों द्वारा मंदिर के गर्भगृह में अर्धनारीश्वर के रूप में विराजमान शिवलिंग पर घृतमंडल बनाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा, जो सायं काल तक पूरा कर लिया जाएगा. ऐतिहासिक शिव मंदिर में मकर संक्रांति के दिन सारा दिन शिव भक्तों का दर्शनों के लिए तांता लगा रहता है. सारा दिन भोलेनाथ की जय-जयकार होती रहती है.
बैजनाथ शिव भूमि शिव भक्तों की आस्था का स्थल है जहां न सिर्फ हिमाचल के बल्कि पूरे देश भर से शिव भक्त अपने भक्ति भाव के साथ यहां पहुंचते हैं.
घृत का है विशेष महत्व, दूर होते हैं चर्म रोग
सालों से चली आ रही इस परंपरा में भक्तजन विशेष आस्था रखते हैं. मकर संक्रांति के सात दिन बाद 21 जनवरी को सुबह की आरती के उपरांत इसकी विधिवत रूप से पूजा-अर्चना कर पुजारी इसे उतारते हैं. बाद में यह घृत लोगों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है. लोग इस घृत को अपने घरों में एक साल तक समृद्धि के रूप में संजो कर रखते हैं. यह घी चर्म रोगों के लिए भी अचूक दबाई मानी जाती है और आज भी लोग इस बात में विश्वास रखते हैं.
FIRST PUBLISHED : January 8, 2025, 14:04 IST
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