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Pitru Paksha: अकाल मृत्यु वाले पितरों का श्राद्ध कब करें? आचार्य से जानें विधि ताकि मिले उनको शांति

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देवघर: 17 सितंबर भाद्रपद पूर्णिमा तिथि के साथ ही पितृपक्ष शुरू होने वाले हैं. ये 15 दिन पितरों को समर्पित रहता है. पितृपक्ष के दिनों मे जातक बिहार के गया में पूर्वजों के नाम से तर्पण श्राद्ध या पिंडदान करते हैं. वहीं, अक्सर लोगों के मन में एक सवाल उठता है कि जिन लोगों की अकाल मृत्यु होती है, उनका श्राद्ध कब करना चाहिए? किस तिथि में उनका तर्पण करें कि उनको शांति मिली? आइए जानते हैं…

देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने Bharat.one को बताया कि 17 सितंबर पूर्णिमा तिथि से पितृपक्ष की शुरुआत होने वाली है और 2 अक्टूबर अमावस्या तिथि तक चलने वाली है. इन दिनों में अलग-अलग तिथियों में पितृ का श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान आदि किया जाएगा. तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण करने से शुभ माना जाता है अन्यथा दूसरी तिथि में श्राद्ध करने से पितृ नाराज भी हो सकते हैं.

अकाल मृत्यु वालों का इस तिथि में करें तर्पण
अकाल मृत्यु वालों के लिए पितृपक्ष की अष्टमी तिथि के दिन तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान करना चाहिए. अगर, अष्टमी तिथि को श्राद्ध, तर्पण नहीं कर पाते हैं तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध कुतुप मुहूर्त में श्राद्ध कर सकते हैं. कुतुप मुहूर्त यानी दोपहर के बाद पंचबली भोग लगा कर श्राद्ध करें. मान्यता है कि ऐसा करने से अकाल मृत्यु वाले पितृ को शांति की प्राप्ति होगी और फिर से मनुष्य योनि में जन्म मिस सकेगा.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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