Hindu Death Rituals : मृत्यु हमारे जीवन का एक ऐसा सत्य है, जिसे न कोई टाल सकता है और न ही नजरअंदाज. हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद किए जाने वाले संस्कार न केवल दिवंगत की आत्मा की शांति के लिए बल्कि परिवार और समाज को जीवन के गूढ़ सत्य की याद दिलाने के लिए भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं. हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से एक है अंतिम संस्कार के समय पानी से भरी मटकी फोड़ना. अक्सर लोग इसे सिर्फ परंपरा समझकर करते हैं, लेकिन इसके पीछे धार्मिक, ज्योतिषीय और व्यावहारिक कई कारण छिपे हैं. वास्तव में, यह परंपरा हमें यह भी सिखाती है कि मृत्यु जीवन का अंत नहीं बल्कि एक नई शुरुआत है. जिस तरह पानी मटकी से बहकर जमीन में मिल जाता है, उसी तरह आत्मा भी अपने कर्मों के अनुसार आगे बढ़ती है. अंततः, मटकी फोड़ने की यह परंपरा न केवल धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह एक भावनात्मक और सामाजिक संदेश भी देती है जीवन के अंतिम क्षणों में शांति, सम्मान और मोक्ष की ओर बढ़ना. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
अंतिम संस्कार में मटकी फोड़ने की प्रक्रिया
हिंदू शास्त्रों के अनुसार, अंतिम संस्कार की सारी क्रियाएं किसी योग्य ब्राह्मण या अनुभवसंपन्न महापात्र के निर्देशन में की जाती हैं. इस दौरान मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति, जिसे मुखाग्नि दाता कहते हैं, मिट्टी की मटकी लेकर चिता के चारों ओर परिक्रमा करता है. मटकी में थोड़ा पानी भरा होता है और उसमें छेद कर दिया जाता है. पहले दक्षिणावर्त और फिर वामावर्त परिक्रमा करने के बाद मटकी को पीछे फेंक दिया जाता है. मटकी फूटते ही पानी बिखर जाता है और यह क्रिया अंतिम संस्कार का एक महत्वपूर्ण चरण मानी जाती है.
ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व
ज्योतिषीय दृष्टि से देखें तो मिट्टी की मटकी मृत शरीर का प्रतीक है और उसमें भरा पानी आत्मा का. परिक्रमा के दौरान पानी का धीरे-धीरे टपकना यह संकेत देता है कि शरीर और आत्मा का संबंध धीरे-धीरे कमज़ोर होता जा रहा है. जब मटकी फूटती है, तो इसका अर्थ है कि आत्मा अब शरीर से पूरी तरह अलग होकर अपनी यात्रा पर स्वतंत्र रूप से निकल सकती है.
शास्त्रों में पंचतत्व जल, अग्नि, पृथ्वी, वायु और आकाश का उल्लेख है. दाह संस्कार और मटकी फोड़ने की प्रक्रिया इस बात का प्रतीक है कि शरीर अब इन पंचतत्वों में विलीन होने जा रहा है. यही नहीं, मटकी का टूटना मृतक के सांसारिक मोह और रिश्तों का अंत दर्शाता है और आत्मा को मोक्ष या नए जन्म की ओर अग्रसर होने में मदद करता है.
व्यावहारिक कारण
धार्मिक कारणों के अलावा मटकी फोड़ने के पीछे व्यावहारिक उद्देश्य भी था. प्राचीन समय में अंतिम संस्कार नदी तट पर नहीं, बल्कि खुले श्मशान भूमि में होता था. पानी से भरी मटकी का टूटना चिता के आसपास की भूमि को गीला कर देता था, जिससे अग्नि के फैलने का खतरा कम हो जाता था. इस तरह यह क्रिया न केवल धार्मिक महत्व रखती थी बल्कि सुरक्षा का उपाय भी बन गई थी.
सामाजिक और भावनात्मक महत्व
मटकी फोड़ना सिर्फ संस्कार का हिस्सा नहीं, बल्कि मृतक के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रदर्शन भी है. परिक्रमा और मटकी फोड़ने की क्रिया एक तरह से परिवार और समाज को यह याद दिलाती है कि जीवन और मृत्यु प्रकृति के नियम हैं. यह प्रक्रिया लोगों को रिश्तों, मोह और सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर जीवन के वास्तविक अर्थ पर ध्यान देने का अवसर देती है.
