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Winter Special Dessert: सर्दियों में अगर आप पहाड़ों की सैर पर आ रहे हैं और वहां की खास डिश ‘शैय्या’ नहीं चखी, तो समझो आपका सफर अधूरा है. चावल के आटे, घी और गुड़ के मेल से बनी यह मीठी डिश सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि ठंड से लड़ने की ताकत भी देती है. पुराने समय से ही पहाड़ी रसोई की शान रही ‘शैय्या’ बनाने का तरीका बहुत आसान है, लेकिन इसका जायका आपको बरसों याद रहेगा. आइए जानते हैं इस पारंपरिक पहाड़ी डिश को बनाने की पूरी विधि और इसके फायदे.
पिथौरागढ़: उत्तराखंड के पहाड़ों में जैसे ही ठंड की दस्तक होती है, घरों की रसोई से एक सौंधी सी खुशबू आने लगती है. यह खुशबू होती है ‘शैय्या’ की. यह पहाड़ों की एक ऐसी पारंपरिक मीठी डिश है, जो सदियों से पहाड़ी परिवारों का हिस्सा रही है. कम मेहनत और घर में मौजूद साधारण चीजों से बनने वाली यह डिश न केवल खाने में लाजवाब है, बल्कि कड़ाके की ठंड में शरीर को अंदर से गर्म रखने का सबसे बेहतरीन नुस्खा भी है.
शैय्या बनाने की रेसिपी
शैय्या बनाने की विधि जितनी सरल है, इसका स्वाद उतना ही गजब का होता है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक कप चावल का आटा लिया जाता है. इस आटे में थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाकर इसे नरम होने तक गूंथ लिया जाता है. यहां एक छोटी सी बात ध्यान रखनी होती है कि आटा न तो बहुत ज्यादा सख्त हो और न ही बहुत गीला. आटा जितना नरम और चिकना गूंथा जाएगा, आपका शैय्या उतना ही मुलायम और स्वादिष्ट बनेगा.
भूनने का सही तरीका ही बढ़ाता है जायका
शैय्या बनाने के लिए करीब आधा कप शुद्ध देसी घी कड़ाही में डालकर मध्यम आंच पर गर्म किया जाता है. जब घी पूरी तरह गर्म हो जाए, तब इसमें गूंथा हुआ चावल का आटा धीरे-धीरे डाला जाता है. आटे को बिल्कुल धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए तब तक भूनना होता है जब तक कि यह अपना रंग न बदलने लगे. इसे जितना तसल्ली से पकाया जाएगा, इसका स्वाद उतना ही निखर कर आएगा. जब आटा घी छोड़ने लगे और कड़ाही से अलग होने लगे, तो समझ लीजिए कि यह अच्छी तरह पक गया है.
गुड़ और तिल का तड़का
जब आटा अच्छी तरह भुन जाए, तब इसमें करीब आधा कप गुड़ डाला जाता है. गुड़ की मात्रा आप अपनी पसंद के हिसाब से कम या ज्यादा कर सकते हैं. गुड़ डालने के बाद मिश्रण को फिर से अच्छी तरह मिलाया जाता है और थोड़ी देर तक पकाया जाता है, ताकि गुड़ पूरी तरह पिघलकर आटे में समा जाए. आखिर में, इसमें दो बड़े चम्मच भुना हुआ तिल डाला जाता है. तिल न केवल शैय्या के स्वाद को दोगुना कर देता है, बल्कि सर्दियों में शरीर के लिए बहुत फायदेमंद भी होता है. तिल की हल्की खुशबू और कुरकुरापन इस डिश को और भी लाजवाब बना देता है.
सर्द शामों का सबसे हेल्दी साथी
बस कुछ ही मिनटों की मेहनत के बाद तैयार हो जाती है पहाड़ों की मशहूर मीठी डिश शैय्या. इसे एकदम गर्मागर्म परोसा जाता है. कड़ाके की ठंड वाली शामों में जब आप गरमागरम शैय्या खाते हैं, तो यह शरीर को तुरंत ऊर्जा (एनर्जी) देता है और मन को भी सुकून पहुंचाता है. यही कारण है कि नए जमाने की मिठाइयों के बीच भी शैय्या का जलवा आज भी बरकरार है.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही Bharat.one (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं Bharat.one (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/recipe-paahadi-traditional-sweet-shaiyya-winter-recipe-himalayan-dish-local18-10129411.html
