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सड़क, घर या स्टेशन कहीं भी आ सकता है हार्ट अटैक, यहां सीखें 5 मिनट की जान बचाने वाली तकनीक

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CPR Dene Ka Tareeka : जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में डॉक्टर राकेश कुमार के नेतृत्व में बीएलएस अभियान के तहत 10 हजार से अधिक लोगों को मुफ्त सीपीआर ट्रेनिंग दी गई है, जिससे कई जिंदगियां बची हैं. कई बार समय पर कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन यानी सीपीआर न मिलने के कारण लोगों की जान चली जाती है.

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जयपुर. जयपुर अपनी बेहतर मेडिकल सुविधाओं के लिए देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में पहचान रखता है. यहां के बड़े अस्पताल न केवल इलाज की उन्नत सुविधाएं देते हैं, बल्कि आम लोगों को आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए सीपीआर जैसी जीवनरक्षक ट्रेनिंग भी प्रदान कर रहे हैं. घर, बाजार, रेलवे स्टेशन, पर्यटन स्थलों या सड़क पर कभी भी किसी को हार्ट अटैक या साइलेंट अटैक आ सकता है.

कई बार समय पर कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन यानी सीपीआर न मिलने के कारण लोगों की जान चली जाती है. इसी को देखते हुए जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल सहित अन्य संस्थाएं स्कूल, कॉलेज और प्रदर्शनियों में निशुल्क सीपीआर ट्रेनिंग देकर लोगों को जागरूक कर रही हैं, ताकि अधिक से अधिक जिंदगियां बचाई जा सकें.

सवाई मानसिंह अस्पताल का बीएलएस अभियान
लोकल-18 से बातचीत में सवाई मानसिंह अस्पताल के सीपीआर एक्सपर्ट डॉक्टर राकेश कुमार ने बताया कि अस्पताल में बीएलएस अभियान के तहत अब तक करीब 10 हजार लोगों को मुफ्त सीपीआर ट्रेनिंग दी जा चुकी है. इनमें नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ, ट्रैफिक पुलिस और स्कूल व कॉलेज के हजारों छात्र शामिल हैं. ट्रेनिंग के लिए अस्पताल में अत्याधुनिक मशीनें और डमी बॉडी उपलब्ध हैं, जिससे सीपीआर की प्रक्रिया लोगों को आसानी से समझाई जाती है. इस प्रशिक्षण का असर यह रहा है कि कई बार आपात स्थिति में प्रशिक्षित लोगों ने मौके पर ही सीपीआर देकर मरीजों की जान बचाई है.

हर व्यक्ति के लिए सीपीआर ट्रेनिंग क्यों जरूरी
डॉक्टर राकेश कुमार के अनुसार आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और व्यायाम की कमी के कारण हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. आए दिन घरों और सार्वजनिक स्थानों पर अचानक हार्ट अटैक की घटनाएं सामने आती हैं. अधिकतर मामलों में मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाया जाता है, लेकिन रास्ते में ही उसकी हालत बिगड़ जाती है. अगर ऐसे समय पर मरीज को तुरंत सीपीआर मिल जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है. सीपीआर ट्रेनिंग लेने वाले कई लोग आपात स्थिति में दूसरों के लिए जीवनरक्षक साबित हुए हैं. इसी कारण लोगों को लगातार सीपीआर सीखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. जयपुर में कोई भी व्यक्ति सवाई मानसिंह अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में जाकर सीपीआर की ट्रेनिंग ले सकता है. एक व्यक्ति को सही तरीके से सीपीआर आ जाए तो वह किसी भी समय और किसी भी स्थान पर किसी की जान बचा सकता है.

हार्ट अटैक आने पर कैसे दी जाती है सीपीआर
सीपीआर की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए डॉक्टर राकेश कुमार बताते हैं कि हार्ट अटैक की स्थिति में मरीज को सीधे जमीन पर लिटाना चाहिए. इसके बाद दोनों हाथों से छाती के बीच वाले हिस्से पर एक मिनट में करीब 100 से 120 बार दबाव देना होता है. एक साइकिल में कम से कम 30 बार छाती को दबाया जाता है, इसके बाद मुंह से मुंह लगाकर सांस दी जाती है. इस प्रक्रिया को लगातार 2 से 3 बार दोहराया जाता है, जिससे मरीज की हार्ट बीट पर असर पड़ता है और कई बार दिल की धड़कन दोबारा शुरू हो जाती है. जानकारी के अभाव या झिझक के कारण कई लोग समय पर सीपीआर नहीं दे पाते और जान चली जाती है. इसी वजह से अस्पताल में डमी बॉडी और मशीनों के जरिए लोगों को वास्तविक परिस्थितियों जैसी ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि जरूरत पड़ने पर वे बिना घबराहट के सही तरीके से सीपीआर दे सकें.

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Anand Pandey

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें

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घर या स्टेशन कहीं भी आ सकता है हार्ट अटैक,जानें 5 मिनट की जान बचाने वाली तकनीक


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