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AYODHYA NEWS: अयोध्या में प्रभु श्रीराम से जुड़ी एक और भव्य कलाकृति ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से प्रभु श्रीराम की एक विशाल और अत्यंत सुंदर प्रतिमा अयोध्या पहुंची है. यह प्रतिमा कर्नाटक की पारंपरिक शिल्प कला और तंजावुर पेंटिंग शैली से प्रेरित है.
इस अद्भुत प्रतिमा के निर्माण में लगभग 2800 घंटे का समय लगा कलाकार ने इसे तंजावुर पेंटिंग शैली में सजाया है, जिसमें 24 कैरेट के स्वर्ण पत्र, माणिक, पन्ना, मोती, मूंगा और हीरे जैसे कीमती रत्नों का प्रयोग किया गया है. प्रतिमा शीशम की लकड़ी से बने एक मजबूत फ्रेम में स्थापित है, जिसकी ऊंचाई लगभग 10 फीट, चौड़ाई 6 फीट और गहराई करीब ढाई फीट है. इस विशाल और कीमती प्रतिमा को भारतीय डाक विभाग की लॉजिस्टिक सेवा के माध्यम से बेंगलुरु से अयोध्या तक सुरक्षित पहुंचाया गया.
डाक विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि प्रतिमा को एक ट्रक के माध्यम से तीन दिनों में अयोध्या लाया गया है. इस दौरान केवल डाक विभाग का एक कर्मचारी और ट्रक चालक ही इसके साथ मौजूद थे. विशेष बात यह रही कि इतनी मूल्यवान मूर्ति की सुरक्षा के लिए किसी अतिरिक्त सुरक्षा एजेंसी को तैनात नहीं किया गया, बल्कि पूरी जिम्मेदारी भारतीय डाक विभाग ने स्वयं निभाई.
अयोध्या पहुंचने के बाद, डाक विभाग के पोस्टमास्टर जनरल प्रणव कुमार द्वारा यह प्रतिमा विधिवत रूप से राम मंदिर ट्रस्ट को सौंप दी गई.इसके बाद प्रतिमा को राम मंदिर परिसर में स्थित तुलसीदास मंदिर के समीप स्थापित किया गया है.इस भव्य कृति को देखने के लिए श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है.
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डाक विभाग के अधिकारी के मुताबिक यह प्रतिमा बेंगलुरु से तीन दिनों में अयोध्या ट्रक के माध्यम से पहुंचा है इस प्रतिमा को लाने में डाक विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी और एक ड्राइवर थे डाक विभाग की वरिष्ठ अधिकारियों ने यह प्रतिमा राम मंदिर ट्रस्ट को सौपा है अब 29 दिसंबर को इस प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा किया जाएगा.
यह प्रतिमा न केवल प्रभु श्रीराम की भक्ति का प्रतीक है, बल्कि भारतीय पारंपरिक कला, शिल्प और डाक विभाग की विश्वसनीय सेवा का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है. अब यह प्रतिमा रामनगरी की शोभा बढ़ाएगी. जो कीमती रत्नो से जड़ित है.
